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साहिल की दास्तानगोई ने लखनऊ का मन मोह लिया

खालिद मुस्तफ़ा की रिपोर्ट:
लखनऊ: हिंदुस्तान के कल्चर के ख़ास हिस्सा रही दस्तानगॉई भले ही लुप्त हो रही है या कम हो गई हो। लेकिन अभी कुछ है जो इन शमा को रोशन किये हुए है। लखनऊ इसका गवाह बना। नोजवान दस्तानगॉई आर्टिस्ट साहिल देहलवी यहाँ मीर पर अपनी दस्तानगॉई पेश की।साहिल ने ये दास्तान “दास्तान ए मीर” थी जो दास्तान मीर तक़ि मीर जो उर्दू शायरी का सबसे बड़ा नाम है उन पर थी।

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ये दास्तान की खास बात ये थी की इसके कुछ पहलु अभी तक कही नहीं पड़े गए थे।जो पहली बार लखनऊ में पढ़ी गई। आंबेडकर ऑडिटोरियम इसका गवाह बना जहा करीब 3500 लोगो ने ये दास्तान सुनी।

साहिल ने बताया कि जब दास्तान गोई का फन खत्म हो रहा था और अँगरेज़ दास्तान सुनाने वालो को सियासी लीडर समझ कर ख़त्म कर रहे है तब नवाब वाजिद अली खान शाह ने कई दास्तान गोह को अपने दरबार में पनाह दी। आज दस्तानगॉई अपने घर लखनऊ वापस आईं।

साहिल ने मीर की ज़िन्दगी पर दस्तानगॉई पेश करते हुवे कहा कि बचपन में बाप के मर जाने के बाद उनके सौतेले भाइयो ने मीर को घर से निकाल दिया था जिसके बाद वो दिल्ली चले गए थे। मगर कुछ अर्से बाद ही लखनऊ या गए। जहाँ वो बाद में उर्दू के खुद ए शोकन बन कर उभरे।इसको साहिल ने कुछ इस तरह के बयान की जिससे लोगो में हौसला भरी मीर की ज़िन्दगी सामने आई। या दास्तान ने खूब वाहवाही लूटी।

आपको बता दे की साहिल ने दिल्ली और गुजरात जैसे सुबो में दस्तानगॉई पेश कर चुके है।सूबे की राजधानी में उनका ये पहला प्रोग्राम होगा।

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