Wednesday , September 20 2017
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सिंधु जल समझौते को लेकर चल रहे विवाद में अमेरिका ने किया हस्तक्षेप

सिंधु जल समझौते को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे विवाद में अमेरिका ने हस्तक्षेप किया है। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने खबर दी है कि अमेरिका ने बिना किसी औपचारिक आमंत्रण के इसमें में हस्तक्षेप करने का फैसला किया और इसके प्रक्रिया शुरू कर दी है।

खबरों के मुताबिक, पिछले शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार से फोन पर बात की। इस दौरान केरी ने कहा कि अमेरिका इस मामले में एक दोस्ताना समाधान की उम्मीद रखता है। केरी ने डार को बताया कि विश्व बैंक के अध्यक्ष ने हाल ही में सिंधु जल विवाद पर भारत के खिलाफ पाकिस्तान की शिकायतों के बारे में बताया।

यह विवाद दो हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट किशनगंगा और रातले को लेकर है, जो भारत की ओर से सिंधु नदी पर बनाया जा रहा है। पाकिस्तान का मानना है कि ये दोनों प्रोजेक्ट सिंधु जल समझौते का उल्लंघन करते है। क्योंकि यह समझौता ऐसी परियोजनाओं के लिए विशेष मानदंड उपलब्ध कराता है।

यह समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 में कराची में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था। समझौते के अनुसार भारत का जहां व्यास, रवि और सतलुज नदियों पर नियंत्रण है। वहीं सिंधु, चेनाब और झेलम पर नियंत्रण पाकिस्तान का है। संधि के तहत विवाद की स्थिति में विश्व बैंक मध्यस्थता कर सकता है। 23 दिसंबर को पाकिस्तानी वित्त मंत्री डार ने बैंक को कहा कि पाकिस्तान अपने आग्रह से पीछे नहीं हटेगा और चूंकि इस पर पहले ही देर हो चुकी है, तो जितनी जल्द हो इस मामले में मध्यस्थता के लिए बैंक की ओर से चेयरमैन की नियुक्ति हो जानी चाहिए। इस सिंधु समझौते के तहत विवाद में शामिल पार्टी की ओर से मध्यस्थता की आग्रह करने के 60 दिनों के भीतर चेयरमैन और इनके तीन सदस्यों की नियुक्ति हो जानी चाहिए।

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