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सिआसत के एडिटर ज़ाहिद अली ख़ान को मिला “लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड”

नई दिल्ली 25 फ़रवरी: क़ौमी दारुल हुकूमत नई दिल्ली में मुनाक़िदा अपनी नौईयत की एक तक़रीब में मुल्क के सरकरदा मुस्लिम मुदीरान् और सहाफ़ीयों को उनकी ख़िदमात के एतराफ़ के तौर पर मुस्लिम मिरर एवार्ड्स पेश किए गए।

हैदराबाद के कसीर उल-इशाअत रोज़नामा सियासत के एडिटर ज़ाहिद अली ख़ान को मुस्लिम मिरर कारनामा हयात एवार्ड और डॉ जाविद जमील को साल की अहम शख़्सियत का एवार्ड दिया गया। दिल्ली के बावक़ार आई आई सी सी में मुनाक़िदा मुस्लिम एमएम 2016 एवार्ड पेशकशी तक़रीब से ज़ाहिद अली ख़ां, जावेद जमील, अमरीकी जहदकार फ्रैंक एफ़ इस्लाम और दूसरों ने ख़िताब किया। मुक़र्ररीन ने मुल्क में बढ़ती हुई इनटॉलेरेंस , मुसलमानों और दुसरे अक़लियतों के ख़िलाफ़ बढ़ते हुए हालात पर गहिरी तशवीश का इज़हार किया। सरकरदा सहाफ़ी और हिन्दी रोज़नामा जन सत्ता के साबिक़ एडिटर ओम थानवी ने इस ख़्याल का इज़हार किया कि हिन्दुस्तान की मौजूदा सूरत-ए-हाल एमरजेंसी के दौर से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक बन गई है।

उन्होंने जवाहर लाल नेहरू यूनीवर्सिटी और हैदराबाद यूनीवर्सिटी के वाक़ियात का हवाला देते हुए कहा कि हुसूल इन्साफ़ के लिए किसी मज़लूम की आख़िरी मंज़िल अदालत ही होती है। अगर वो अदालतों से भी मायूस होजाएंगे तो कहाँ जाऐंगे। हिंद अमरीकी जहदकार फ्रैंक इस्लाम ने अवामी भलाई और क़ौमी इत्तेहाद-ओ-यकजहती पर काम करने की ज़रूरत पर-ज़ोर दिया।

उन्होंने मुस्लिम एमएम को बे आवाज़ों की आवाज़ क़रार दिया। इस से पहले मुस्लमान, मीडिया और चैलेंजेज के उनवान से एक मुज़ाकरा में नामवर सहाफ़ीयों ने अपनी राय का इज़हार करते हुए कहा कि आज मुतबादिल मीडिया खड़ा करने की सख़्त ज़रूरत है। नैशनल मीडिया के रवैये को हदफ़ तन्क़ीद बनाते हुए कहा कि वो दियानतदारी और इन्साफ़ और सहाफ़त के उसूलों को बुरी तरह पामाल करके हुकूमत वक़्त का एक फ़रीक़ बन गया है।

इस मुबाहिसा में समीना रज़्ज़ाक़ (मुंबई), क़ुर्बान अली (राज्य सभा टीवी), इक़बाल अहमद (बी-बी सी), तसनीम कौसर (नायब मुदीर मिशन), शाहीन नज़र (शोबा-ए-सहाफ़त शारदा योनी रस्टी) और अब्दुल बारी मसऊद (एसोसी ऐट एडिटर मुस्लिम मिरर) ने हिस्सा लिया।

मुस्लिम मिरर के एडिटर सय्यद ज़ुबैर अहमद ने कहा कि नेशनल मीडिया के एक हलक़ा के तर्ज़-ए-अमल के पेश-ए-नज़र बह ज़बान अंग्रेज़ी मुस्लिम मिरर डाट काम नवंबर 2012 में शुरू किया गया ताकि मुसलमानों के मुताल्लिक़ मसाइल और उमूर और मुल्क के मसाइल और वाक़ियात को सही अंदाज़ और पूरी दियानतदारी के साथ पेश किया जाये।

मुस्लिम मिरर अपनी इस कोशिश में बड़ी हद तक कामयाब हुआ है जिसने एक अरसा में अपनी एक शिनाख़्त बनाई है और वो मुस्लिम उमूर के बारे में मालूमात का एक ज़रीया बन गया। इस जिहत मुस्लिम मिरर ने एक क़दम और बढ़ाते हुए कम्यूनिटी जर्नलिज़म को फ़रोग़ देने की ग़रज़ से इस मैदान में काम करने वाले अफ़राद और इदारों को एवार्ड पेश करने का फ़ैसला किया ताकि उनकी हौसला-अफ़ज़ाई हो सके।

यहां इंडिया इस्लामिक कल्चरल सैंटर में मुनाक़िदा तक़रीब में जनाब डाक्टर जावेद जमील को मैन आफ़ दी एयर 2015-ए-का ऐवार्ड जनाब फ्रैंक इस्लाम ने पेश किया।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि अब तक बंगाली बोलने वाले मुसलमानों का कोई अख़बार नहीं था जिसकी कमी को रोज़नामा क़लम, पूरी करने की कोशिश कर रहा है जो इस वक़्त रियासत को तीसरा बड़ा बंगाली अख़बार बन गया है। उन्होंने कहा कि मग़रिबी बंगाल में तीन करोड़ से ज़्यादा और आसाम में तक़रीबन एक करोड़ मुस्लमान बंगाली बोलते हैं। इसी तरह इलाक़ाई ज़बान में मलयालम में शाय हो रहे रोज़नामा माधयामम के ग्रुप एडिटर ओ अबदुर्रहमान को भी एवार्ड पेश किया गया। बी-बी सी के इक़बाल अहमद, इंडियन ऐक्सप्रेस के मुज़म्मिल जलील, खोजी सहाफ़त के लिए राना अय्यूब, अंग्रेज़ी सहाफ़त में नुमायां ख़िदमत के लिए पंद्रह रोज़ा मिली गज़्ट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में नुमायां कारकर्दगी के लिए शहाबुद्दीन याक़ूब, कम्यूनिटी जर्नलिज़म के लिए मुमताज़ आलम, बेहतरीन न्यूज़ पोर्टल के लिए टू सर्किल डाट नेट, कार्टूनिस्ट यूसुफ़ मना नीज़ सबधर उदीप चक्रवर्ती को बादधज़ मर्ग एवार्ड से नवाज़ा गया। इस के अलावा बेहतरीन कम्यूनिटी अख़बार के लिए रोज़नामा इन्क़िलाब और रोज़नामा अख़बार मशरिक़ को भी इस मौके पर एवार्ड पेश किए गए।

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