Wednesday , September 20 2017
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सिमी के पूर्व अध्यक्ष का दावा, एनकाउंटर में मारे गये कैदी सिमी के सदस्य नहीं थे

आजमगढ़ : 15 वर्ष पहले सक्रिय रहे स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया पर लगाए गए बैन के दौरान संगठन के आखिरी अध्यक्ष रहे डॉ. शाहिद बद्र फलाही ने भोपाल एनकाउंटर पर सवालिया निशान खड़े करते हुए उच्च स्तरीय जांच किए जाने की मांग की. आजमगढ़ निवासी डॉ. फलाही का दावा है कि प्रतिबंध के बाद सिमी का अस्तित्व समाप्त हो गया. उसके बाद भी भोपाल सेंट्रल जेल से फरार बताए जाने वाले आठ आतंकियों को कुछ ही घंटों बाद मुठभेड़ में मारे जाने व उन्हें बगैर जांच किए सिमी का सदस्य बताना गलत है.

डॉ. फलाही ने तर्क दिया कि 2001 में सिमी पर प्रतिबंध लगा और जो लोग मुठभेड़ में मारे गए हैं वे 2007 में पकड़े गए थे. प्रतिबंध के बाद सिमी ने कभी कोई सदस्य नहीं बनाया तो किस आधार पर इन्हें सिमी का सदस्य बताया जा रहा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों के माध्यम से और भी सवाल खड़े किए. दलील दी कि मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के हाथ में मौजूद कलाई घड़ी व कमर में बेल्ट कहां से आया. जेल में कलाई घड़ी या बेल्ट के उपयोग के लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ती है.

अगर ये खतरनाक आतंकी अथवा अपराधी थे तो इन्हें एक साथ एक बैरक में क्यों रखा गया. उधर, आजमगढ़ में खुफिया एजेंसियों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है. हालांकि, इस संबंध में जिले के उच्चाधिकारी कुछ भी बताने से इन्कार कर रहे हैं.

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