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सियासत दैनिक‌ के क़तर साप्ताहिक एडीशन कि शानदार शुरुआत‌

* उर्दू जानने वाले, वतन छोडकर दुसरे मुलकों में रहने वालों की अहम ज़रूरत पुरी ,अनुष्ठान समारोह‌ से हिंदूस्तानी सफ़ीर दीपा गोपालन , आमिर अली ख़ान और दुसरे लोगों का बयान‌

* उर्दू जानने वाले, वतन छोडकर दुसरे मुलकों में रहने वालों की अहम ज़रूरत पुरी ,अनुष्ठान समारोह‌ से हिंदूस्तानी सफ़ीर दीपा गोपालन , आमिर अली ख़ान और दुसरे लोगों का बयान‌
दोहा । सियासत संस्था के क़तर में साप्ताहिक एडीशन का आज शानदार और बहतरीन समारोह‌ में अनुष्ठान किया गया। क़तर कि नामवर इशाअती संस्था दारु लशरक़ ने सियासत संस्था के साथ मिलकर‌ वतन छोडकर दुसरे मुलकों में रहनेवालों की बहुत पुरानि ज़रूरत को पूरा करने में बहुत अछ्छा रोल अदा किया है।

सियासत दैनिक‌ हिंदूस्तान के नामवर उर्दू दैनीकों में से एक है जो एक साथ दो राज्यों हैदराबाद और कर्नाटक कि राजधानि हैदराबाद और बैंगलुर से छप‌ता है।

दोहा एडीशन इस रोज़नामा का पहला इंटरनेशनल एडीशन है हालाँकि अभि ये साप्ताहिक‌ है। ये साप्ताहिक‌ अख़बार हिंदूस्तानी सफ़ीर बराए क़ुतर दीपा गोपालन और पाकिस्तान के कौंसलर मुहम्मद अफ़ज़ल शेख़ की मौजूदगी में जारी किया गया।

हिंदूस्तान की सफ़ीर दीपा गोपालन ने इस मौके पर ब्यान‌ करते हुए कहा कि दारु लशरक़ का ये एक बहुत अछ्छा इक़दाम है। ये साप्ताहिक‌ ख़बरनामा बडी तादाद में उर्दू जाननेवालें वतन छोडकर क़तर में रहते हैं, कि ज़रूरीयात को पुरा करेगा। उन्हें खासतौर पर ट्रैफ़िक के काइदें और दुसरी अहम मालूमात पहुंचाएगा।

जो लोग उर्दू के सिवाए कोई दूसरी ज़बान नहीं पढ़ सकते ये साप्ताहिक‌ ख़बरनामा उन के लिए बहुत फाइदामंद‌ साबित होगा। हिंदूस्तानी सफ़ीर ने कहा कि उर्दू हिंदूस्तान की चौथी सब से ज़्यादा बोली जाने वाली ज़बान है। लगभग‌ 6 करोड़ उर्दू जानने वालें लोग‌ कश्मीर से कन्याकुमारी तक मुल्क भर में फैले हुए हैं।

ये ज़बान हिंदूस्तान के फुनूने लतीफ़ा, तहज़ीब ओर तमद्दुन, अदब ओर सिनेमा के लिए ज़बरदस्त हिस्सा अदा करचुकी है। इन के ख़्याल में शिरकत करते हुए पाकिस्तान के कौंसलर बराए क़तर मुहम्मद अफ़ज़ल शेख़ ने कहा कि ये साप्ताहिक‌ ख़बरनामा हिंदूस्तान और पाकिस्तान के वतन छोडने वालों को अपने अपने मुल़्क की ताज़ा तरीन तबदीलीयों से वाक़िफ़ होने में मदद करेगा।

ये दोनों बडे मुल्कों के लोगों को एक दूसरे के क़रीब लाने के बडे मक्सद को भी पुरा करेगा क्योंकि दोनों मुल्क‌ एक ज़बान भी रखते हैं। उन्हों ने अंजुमन फ़रोग़ उर्दू दोहा के किरदार का भी जिक्र किया। ये दोहा की एक तंज़ीम है जो हर साल 2 लोगों को जिन में से एक हिंदूस्तान और एक पाकिस्तान का होता है, उर्दू के लिए ख़िदमात पर उन्हें एज़ाज़ दिया करती है। ज़बान की मक़बूलियत का जिक्र करते हुए उन्हों ने नामवर उर्दू शायर दाग़ देहलवी का एक शेर वहां मौजुद लोगो के सामने पेश‌ किया।
उर्दू है जिस का नाम हमें जानते हैं दाग़
सारे जहां में धूम हमारी ज़बां की है
अनुष्ठान समारोह‌ के मेहमान ख़ुसूसी न्यूज़ एडीटर रोज़नामा सियासत हैदराबाद (हिंदूस्तान) जनाब आमिर अली ख़ान ने इस मौके पर बयान करते हुए कहा कि हिंदूस्तान में राजय सरकारों की तरफ‌ से उर्दू रोज़नामों को इश्तिहारात जारी करते हुए ताईद‍ ओर हिमायत बडि हद तक कम है हालाँकि हिंदूस्तान उर्दू ज़बान का अहम मुकाम ओर गड‌ है। ये ज़बान मुल़्क की सदीयों पुरानी तकसीरी तहज़ीब‍ ओर‌-तमद्दुन की अक्कासी करती है।

उन्हों ने कहा कि रियास्ती हुकूमत आंधरा प्रदेश का बजट अख़बारात को इश्तिहार जारी करने के लिए दो करोड़ अमेरीकी डालर तय है, लेकिन रियासत कि राजधानी हैदराबाद से शाये होने वाले 3 उर्दू रोज़नामों को सिर्फ 2 लाख डालर मालियती सरकारी इश्तिहारात हासिल होते हैं।

उन्हों ने कहा कि रोज़नामा सियासत का क़तर एडीशन दारुल शरक़ की तरफ‌ से साप्ताहिक‌ बुनियाद पर शाये किया जा रहा है, जो हिंदूस्तान और पाकिस्तान के वतन छोडकर यहां रहने वालों की जरूरतों को पुरा करेगा। साप्ताहिक‌ सियासत की अनुष्ठान समारोह‌ की सदारत नायब जनरल मैनेजर दारुल शरक़ इब्राहीम अलसीद ने की।

समारोह‌ में न्यूज़ एडीटर रोज़नामा सियासत हैदराबाद (हिंदूस्तान) जनाब आमिर अली ख़ान, मैनेजर ग़ैरमुल्की इशाअत दारु लशरक़ नीगल नोरोन्हा, मनीजिंग एडीटर दी पननसोला ख़ुसरो परवेज़, एडीटर हुस्न चोघले, अफ़ज़ल शेख़, अदील अकबर, सय्यद अबदुलहई, एम एस बुख़ारी और कई दुसरे मुमताज़ मुहक़्क़िक़ीन, शुअरा और मुअज़्ज़िज़ मेहमानों ने जिन का ताल्लुक़ हिंदूस्तान और पाकिस्तान की उर्दू बिरादरी से था, शिरकत की।

शिर्क़ और दी पीननसोला के इलावा दारुल शरक़ की इशाअतों में इंटरनेशनल‌ हेराल्ड ट्रीबीवन, बी इंटरनैशनल एडीशन आफ़ दी न्यूयार्क टाइम्स भी शामिल हैं। हैदराबाद (हिंदूस्तान) का नामवर और बडि तादाद में छपने वाला रोज़नामा सियासत जिस कि शुरुआत‌ 60 से भी ज़्यादा साल पहले हुइ थी, अब एक अख़बार से ज़्यादा एक तहरीक बन चुका है, जो हैदराबाद के मुसलमानों की भलाइ के लिए कई प्रोग्राम्स चलाता है।

ख़लीजी मुलकों में अपने बिरादरान इस्लाम और हिंदूस्तान के छोडने वालों की बडी तादाद के मस्लों से भी उसे गहरी दिलचस्पी है और वो इन मस्लों को जलद‌ और ख़ुशगवार तरिके से हल करना चाहता है। उम्मीद है कि रोज़नामा सियासत हैदराबाद (हिंदूस्तान) का ये ख़लीजी साप्ताहिक एडीशन ना सिर्फ हिंदूस्तानी और पाकिस्तानी उर्दू जानने वालें वतन छोडकर यहां बसने वालों को अपने वतन की ताज़ा तरीन ख़बरें देगा बल्कि उन्हें सरहदों से बालातर होकर तहदीद‍ ओर‌-सक़ाफ़्त, ज़बान और इंसानियत की बुनियाद पर खासतौर पर मुसलमानों के आपस के मसलों को हल करने केलिए एक होकर कोशिश करने पर आमादा करेगा।

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