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सिर्फ़ आप के वोट के लिए..

ऊंचे पहाड़ों, घने जंगलों, उफनती नदियों, गहिरी घाटियों, तपते सहरा, बर्फ़ से ढकी वादियों और ख़राब रास्तों को पार कर आप तक पहुंचता है इलेक्शन कमीशन। सिर्फ़ आप के वोट के लिए।

ऊंचे पहाड़ों, घने जंगलों, उफनती नदियों, गहिरी घाटियों, तपते सहरा, बर्फ़ से ढकी वादियों और ख़राब रास्तों को पार कर आप तक पहुंचता है इलेक्शन कमीशन। सिर्फ़ आप के वोट के लिए।
इलेक्शन कमीशन को वोटरों को पोलिंग के लिए बेदार करने के लिए जितनी कोशिश करनी पड़ती है, इस से कहीं ज़्यादा मेहनत वोटरों तक पहुंचने के लिए नाक़ाबिले रसाई रास्तों को पार करने में करनी पड़ती है. लेकिन कोई भी चैलेंज या रुकावट उसे अपने काम को अंजाम देने से नहीं रोक पाता। वो हमेशा दूर दराज़ के इलाक़ों के वोटरों तक पहुंचने में कामयाब रहा है।

कमीशन की इस मुश्किल मेहनत को देखते हुए वोटरों के लिए ज़रूरी हो जाता है कि वो बुनियादी तौर पर वोटिंग में शामिल हों। कमीशन के मुलाज़िम वोटरों तक पहुंचने के लिए कितनी दुख भरे सफ़र करते हैं, ये बात इससे समझी जा सकती है कि 2009 के आम इंतिख़ाबात में सड़क ठीक नहीं होने की वजह से आसाम के सोनितपुर ज़िला में इंतिख़ाबात का मवाद पहुंचाने के लिए दो बैलगाडियों का भी एहतिमाम किया गया था और रियासत के कई हिस्सों में इंतिख़ाबात हुक्काम और मवाद को ले जाने के लिए पालतू हाथियों का इस्तिमाल किया गया था।

अंडमान निकोबार जज़ाइर में वोटरों तक पहुंचना हमेशा कठिन रहा है। यहां कई मुक़ामात पर पहुंचने के लिए इंतिख़ाबी हुक्काम को कश्तियों से 35 से 40 घंटे तक सफ़र करना पडता है। 2009 के आम इंतिख़ाबात में लक्षदीप में 105 पोलिंग मर्कज़ तो ऐसे थे जहां कश्तियों से ही पहुंचा जा सका था। इसी तरह मंकी जज़ाइर में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनें हैलीकैप्टर से पहुंचाई गईं।

रेगिस्तानी इलाक़ों में वोटरों को वोट डालने के लिए ज़्यादा नहीं चलना पड़े, कमीशन की इस पर भी नज़र रहती है. इस लिए इस ने 2009 के आम इंतिख़ाबात में राजिस्थान के बाड़मेर जैसलमेर अज़ला में मेनाव, जय सलिया, नेईदाईय, टोबा, क़ायम किये गये और रबलाव फकीरो वाला गांव के 2324 वोटरों तक पहुंचने के लिए छः गशती पोलिंग मर्कज़ क़ायम किए थे।

2009 में . इंतिख़ाबात कराने के लिए 47 लाख मुलाजिमीन, 12 लाख सेक्यूरिटी और 2046 मुबस्सिर तैनात किए गए थे । मशीनें पोलिंग मराकिज़ तक ले जाने के लिए 119 ट्रेनों और 55 हेलीकाप्टरो का इंतिज़ाम किया गया था। इस के इलावा वोटों की गिनती के लिए 1080 मर्कज़ बनाए गए जिन में तक़रीबन साठ हज़ार मुलाज़िमीन लगाए गए थे।

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