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सिर्फ छह महीने में अकाल के कारण दो करोड़ इंसानों की मौत का खतरा

स्वीटजर्लैंड: दुनिया के चार विभिन्न क्षेत्रों में अकाल के कारण केवल छह महीने के भीतर दो करोड़ से अधिक इंसानी मौतों का खतरा है. विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुसार यह संख्या यूरोपीय देश रोमानिया या अमेरिकी राज्य फ्लोरिडा के कुल आबादी से भी अधिक है.

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स्वीटजर्लैंड के शहर जिनेवा से समाचार एजेंसी रोइटरज़ के रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम के वरिष्ठ अर्थशास्त्री आरिफ हुसैन ने कहा है कि यमन, पूर्वोत्तर नाइजीरिया और दक्षिण सूडान में युद्ध के परिणामस्वरूप न केवल खाद्यान्न की कीमतें बहुत अधिक हो चुकी हैं बल्कि इस स्थिति ने असंख्य परिवारों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है. यमन में लड़ाई से वर्षों की मेहनत बर्बाद हो गई है, यमन के कई इलाकों में भोजन की कमी से अकाल का खतरा पैदा हो गया है.

आरिफ हुसैन ने रोइटरज़ के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि अफ्रीका महाद्वीप के पूर्वी हिस्से सूखा ग्रस्त होने से इस क्षेत्र में कृषि को विनाशकारी हद तक गंभीर नुकसान होने का खतरा है. उन्होंने कहा कि विश्व खाद्य कार्यक्रम में बतौर एक अर्थशास्त्री हम ने पिछले करीब पंद्रह वर्षों में ऐसा पहली बार देखा है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा दुनिया के चार अलग अलग क्षेत्रों को एक साथ अकाल के खिलाफ चेतावनी दी जा रही है. उन्होंने कहा,”यह बात अविश्वसनीय है कि आज इक्कीसवीं सदी में भी दुनिया इस हद तक सूखे और अकाल का सामना कर रही है कि विशेषज्ञ केवल छह महीने की अवधि में 20 मिलियन या दो करोड़ से अधिक तक संभावित इंसानी हलाकतों के खिलाफ चेतावनी जारी करने पर मजबूर हो गए हैं. आरिफ हुसैन ने रोइटरज़ को बताया,”अगर मैं सोमालिया की वर्तमान स्थिति को देखूं तो वहां विशेष रूप से खाद्यान्न की आसमान छूती हुई कीमतें, पशुओं की कीमतों में भारी गिरावट और कृषि क्षेत्र के श्रमिकों की मजदूरी में बहुत अधिक गिरावट इस बात की ओर इशारा करते हैं कि सोमालिया में अकाल के कारण इंसानी मौतों का दुखद सिलसिला बहुत जल्द देखने में आ सकता है.” दक्षिण सूडान में भी हजारों भूख के कारण मौत के मुंह में जा सकते है.

दस वर्षों में पाकिस्तान अकाल का शिकार हो सकता है, रिपोर्ट रोइटरज़ के अनुसार संकट, सूखे और अकाल के शिकार मनुष्य की मदद करने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रणाली को पहले ही वैश्विक स्तर पर अशांति के शिकार देशों के नागरिकों को देश छोड़ने जैसा एक तारीखी हद तक गंभीर रूह्जान का सामना है. और सीरिया, इराक, अफगानिस्तान, पूर्वी यूक्रेन, बुरुंडी, लीबिया और जिम्बावे में मानवीय राहत गतिविधियां चरम पर हैं. ऐसे में दुनिया के चार विभिन्न क्षेत्रों में करोड़ों इंसानों की भूख के हाथों मौत का खतरा एक ऐसी दुखद स्थिति है, जिसने अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों और उनके कार्यकर्ताओं को अधिक परेशान कर दिया है. इसके अलावा डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगो, मध्य अफ्रीकी गणराज्य और नाइजर ऐसे देशों की मिसाल हैं, जहां खाद्यान्न की आपूर्ति के संबंध में स्थिति में स्थायी अनिश्चितता पाई जाती है और स्थानीय स्तर पर इन देशों में ऐसे संसाधन भी उपलब्ध नहीं हैं कि किसी तरह वहां संभावित अकाल की रोकथाम के लिए कोई क्षेत्रीय समाधान निकाले जा सकें.

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