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सुप्रीम कोर्ट करेगा जांच की ट्रिप्पल तालाक धर्म के लिए मौलिक है या नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को छह याचिकाओं के एक बैच पर सुनवाई शुरू की, जिसमे ये मुकमल किया जाएगा की ट्रिप्पल तालाक मुस्लिम महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है या नहीं।

अदालत ने कहा कि, वह यह जांच करेगी कि क्या ट्रिप्पल तलाक धर्म के लिए मौलिक है या नहीं। अदालत ने कहा, “हम यह भी जांच करेंगे कि क्या ट्रिपल तलाक को लागू करना मौलिक अधिकार का हिस्सा है या नहीं।”

ट्रिपल तालक का समर्थन करने वालों में अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमात-ए-इस्लामी हिंद हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश जे.एस. खेहर के नेतृत्व वाली पांच न्यायाधीश की संविधान खंडपीठ में जस्टिस कुरियन जोसेफ, रोहिंटन एफ नरीमन, उदय उमेश ललित और एस अब्दुल नज़ीर शामिल हैं। न्यायमूर्ति ‘नज़ीर’ के लिए यह पहली बार होगा जब वे संविधान खंडपीठ मे शामिल होंगे।

केंद्र सरकार ने अदालत से कहा की वे एक बहस दोबारा शुरू करें की, निजी कानूनों को संविधान के अनुच्छेद 13 (क़ानून के असंगत या मौलिक अधिकारों के विरूद्ध कानून) के दायरे में लाया जा सकता है या नहीं ।

अगर सर्वोच्च न्यायालय इससे सहमत होती है की अनुच्छेद 13 के तहत कानून की परिभाषा में निजी कानून शामिल हो सकते हैं, तब पीड़ित व्यक्ति व्यापक रूप से विशेष कानून को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए अदालत मे जा सकते हैं।

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