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सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों की मौजूदगी में हज सब्सिडी पर बहस गैर ज़रुरी: हाफ़िज़ नौशाद

नई दिल्ली। हज कमेटी ऑफ इंडिया के पूर्व सदस्य हाफिज नौशाद अहमद आजमी ने हज सब्सिडी पर नई राजनीतिक बहस को गैर ज़रुरी बताते हुए सरकार से आग्रह किया है कि हज की सुविधाओं को और बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाए।

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न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार यहां जारी एक बयान में आजमी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट 2012 में केंद्र सरकार को जब यह निर्देश दे चुकी है कि अगले 10 वर्षों के भीतर हज सब्सिडी को धीरे-धीरे कम करते हुए समाप्त कर दिया जाए और सब्सिडी वाली राशि को अल्पसंख्यक समुदाय के शैक्षिक और सामाजिक विकास पर खर्च किया जाये, तो उस पर बिला वजह राजनीतिक बहस की कोई ज़रूरत नहीं रह जाती ।

गौरतलब है कि पिछले दिनों मजलिस इत्तेहादुल मुसलमीन के सांसद असद उद्दीन ओवैसी की तरफ से हज सब्सिडी खत्म करने की मांग और केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मुख्तार अब्बास नकवी ने इस साल हज सब्सिडी में कोई कमी न करने का भरोसा दिलाया, हज सब्सिडी के संबंध में उठने वाले सवालात की समीक्षा के लिए एक छह सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति के गठन की बात की, जिस से एक बार फिर इस बारे में राजनीतिक बहस छिड़ गई है।

आजमी ने इस तर्क के साथ कि सुप्रीम कोर्ट के संबंधित निर्देश पर प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद इस तरह की राजनीतिक बहस की कोई जरूरत नहीं रह जाती. उन्होंने कहा कि इसी तरह 2013 में भारतीय हज के कम किये गये कोटे की इस साल हुई बहाल की घटना भी सामान्य घटना है, सरकार को इसका श्रेय लेने के बजाय बहाल कोटे से उन हज यात्रियों को फायदा पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए, जो हज कमेटी ऑफ इंडिया पर भरोसा करते हैं तथा हज सुविधाओं का दायरा भी उस बढ़ोतरी के हिसाब से बढ़ाया जाए।

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