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सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र से पूछा कि कोलेजियम की सिफारिशों के बावजूद सरकार जजों का तबादला क्यों नहीं कर रही

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केन्द्र सरकार से पूछा कि कोलेजियम की सिफारिशों के बावजूद वो न्यायाधीशों का तबादला क्यों नहीं कर रही है। कोर्ट ने दो हफ्तों के भीतर केंद्र से लंबित तबादलों के बारे में विस्तार से रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश भी दिया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय में ऐसे न्यायाधीशों का निरंतर बने रहना अटकलें और भ्रम पैदा करने वाला है। कोर्ट ने कहा कि सिफारिशों पर बैठे रहने की बजाय केन्द्र को इन पर पुनर्विचार के लिए कोलेजियम को लौटा देना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कहा कि तबादला होने के बावजूद ऐसे न्यायाधीशों का उन्हीं उच्च न्यायालयों में बने रहना अटकलों और भ्रम को जन्म देता है। यदि केन्द्र सरकार को इन सिफारिशों से किसी प्रकार की परेशानी है तो उन्हें हमें वापस भेज दे, हम उन पर गौर करेंगे। इन सिफारिशों पर बैठे रहने का कोई औचित्य नहीं है।

इसके बाद सरकार का पक्ष करते हुए अटार्नी जनरल रोहतगी ने कोर्ट से कहा कि नवंबर 2016 में ही सभी फाइलों को मंजूरी मिल चुकी है और कुछ भी लंबित नहीं है। इसके बाद पीठ ने सवाल किया कि न्यायाधीशों के तबादले का क्या हुआ जिनके बारे में कोलेजियम ने सिफारिश की थी? आप इन पर दस महीने से भी अधिक समय से बैठे हैं।

इस पर रोहतगी ने कहा कि उन्हें तबादलों की सिफारिशें लंबित होने के बारे में आवश्यक निर्देश प्राप्त करने की आवश्यकता है और इसके लिए तीन सप्ताह का वक्त चाहिए। गौरतलब है कि न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर आज मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वे न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्तियों को लेकर लगातार सवाल करते रहे हैं।

 

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