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सुप्रीम कोर्ट ने नीट परीक्षा में उर्दू जोड़ने के लिए किया नॉटिस जारी

15 अप्रैल 213 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार रिसोर्स डिपार्टमेंट, सीबीएसई, मेडिकल कॉउंसिल ऑफ़ इंडिया इत्यादि को मेडिकल दाखलों के लिए होने वाली नीट परीक्षा में उर्दू माध्यम जोड़ने के लिए नोटिस जारी किया था। 2013 में नीट परीक्षा 6 क्षेत्रीय भाषा बंगाली, मराठी, गुजराती, तेलगु, आस्सामिस, हिंदी और इंग्लिश में आयोजित की जाने वाले थी. विभाजित जस्टिस बेंच के सदस्य जस्टिस ऐके पटनायक और जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय ने उत्तरदायकों से एक हफ्ते में जवाब मांगा है।

जमीअत उलामा-ए-हिन्द, और महाराष्ट्र बीड की रहने वाली अंसारी महीन फातिमा ने कोर्ट से उर्दू माध्यम में पढ़ने वाले छात्रों के लिए नीट परीक्षा में 8 राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय भषाओं के साथ उर्दू को भी जोड़ने का आदेश देने का आग्रह करते हुए याचिका दायर की थी। अनूप जॉर्ज चौधरी वरिष्ठ वक़ील, मोहम्मद परवेज़ डाबास और शुऐबुद्दीन एड्वोकेट याचिका के पक्ष में सुनवाई कर रहे हैं उनका कहना है कि 8 क्षेत्रीय भाषाओँ में आयोजित की जाने वाली नीट परीक्षा में उर्दू का ना होना पक्षपाती, मनमानी और बिना वजह का फैसला है और साथ ही संविधान के आर्टिकल 14 और 21 का भी उल्लंघन हैं।

जमीअत उलेमा-ए-हिन्द के जनरल सेक्रेट्ररी मौलाना महमूद मदनी जो की इस कैसे में आर्थिक रूप से मदद कर रहे हैं उनका कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ नीट परीक्षा में उर्दू छात्रों के भाग लेना का ही नहीं है बल्कि इसका प्रभाव हज़ार उर्दू मीडियम कालेजों के भविष्य पर भी पड़ेगा।

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