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सुभाष चंद्र बोस की खु़फ़ीया दस्तावेज़ात पर मफ़ाद-ए-आम्मा की दरख़ास्त मुस्तरद

नई दिल्ली: सुप्रीमकोर्ट ने आज एक मफ़ाद-ए-आम्मा की दरख़ास्त पर समात से इनकार कर दिया है जिस में सुभाष चंद्र बोस से मुताल्लिक़ दस्तावेज़ात का इफ़शा-ए-करने के लिए मर्कज़ी हुकूमत को हिदायत देने की गुज़ारिश की गई है। जस्टिस ए आर दावे और जस्टिस ए के गोविल पर मुश्तमिल बेंच ने कहा पर विज़ारत-ए-दाख़िला और प्रिंसिपाल सेक्रेटरी प्राइम मिनिस्टर ऑफ़िस के जवाब का इंतेज़ार किया जाये।

अर्ज़ी को समाअत से ख़ारिज करते हुए बेंच ने दरख़ास्त गुज़ार उसने असीस मुख‌र्जी से कहा कि उनके पास दो रास्ते हैं। एक ये कि वो हाइकोर्ट से रुजू हो सकते हैं, दूसरे ये कि इस मसले पर हुकूमत के जवाब का इंतेज़ार करें। मुख़र्जी ने ये इल्ज़ाम आइद किया कि पेशरू हुकूमतों ने इस केस के हक़ायक़ का इन्किशाफ़ नहीं किया और बताया कि मतलूब इत्तेलाआत के अदम इफ़शा-ए-से बुनियादी हुक़ूक़ की पामाली होती है जिस पर सुप्रीमकोर्ट बेंच ने कहा कि बराए मेहरबानी हर एक मामले में बुनियादी हुक़ूक़ की बात ना उठाएं। दरख़ास्त गुज़ार ने मग़रिबी बंगाल हुकूमत की जानिब से हालिया 64 खु़फ़ीया फाइल्स की इजराई का हवाला देते हुए मख़र्ज़ी हुकूमत क़व्वास तरह का रास्ता इख़तियार करने की हिदायत देने की इस्तिदा की थी।

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