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सुरक्षा परिषद भारत-पाक के बीच बढते तनावों पर चर्चा नहीं कर रहा

संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र में रुस के दूत और अक्तूबर माह के लिए सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष ने इस वैश्विक संस्था में कश्मीर मसला और भारत के सर्जिकल स्ट्राईक का मुद्दा उठाने वाले पाकिस्तान को स्पष्ट तौर पर झिडकते हुए कहा है कि सुरक्षा परिषद भारत एवं पाकिस्तान के बीच बढते तनावों पर चर्चा नहीं कर रहा. संयुक्त राष्ट्र में रुस के राजदूत विताली चर्किन ने कल संवाददाता सम्मेलन के दौरान, भारत और पाकिस्तान के बीच के तनाव से जुडे सवाल को बीच में ही रोकते हुए कहा, ‘‘मैं इसमें नहीं पडना चाहता. कृपया नहीं…नहीं… मैं इसमें नहीं पडना चाहता.’ रुस द्वारा अक्तूबर माह के लिए 15 सदस्य देशों वाली परिषद की अध्यक्षता संभाले जाने पर चर्किन मीडिया को संबोधित कर रहे थे.

जब उनसे पूछा गया कि वह इस मुद्दे पर टिप्प्णी क्यों नहीं करेंगे, तो उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि मैं सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष हूं. सुरक्षा परिषद इस (भारत-पाकिस्तान की स्थिति) पर चर्चा नहीं कर रहा.’ चर्किन ने कहा, ‘‘क्षमा करें श्रीमान, मैं इसमें नहीं पडना चाहता. कोई टिप्पणी नहीं. कृपया क्षमा करें.’ जब उनसे दोबारा पूछा गया कि वह और रुस भारत-पाकिस्तान की स्थिति पर चर्चा करने से इतना ‘बच’ क्यों रहे हैं, तो चर्किन ने कहा, ‘‘मुझे यकीन है कि आप जानते हैं. बहुत सी अन्य चीजें भी हैं.’ चर्किन की इन टिप्पणियों को पाकिस्तान के लिए एक सीधी फटकार माना जा रहा है क्योंकि उसने पिछले ही सप्ताह भारत द्वारा नियंत्रण रेखा के पार आतंकी ठिकानों पर किए गए सर्जिकल स्ट्राईक और कश्मीर के मुद्दे को लेकर सुरक्षा परिषद का द्वार खटखटाया था.

इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की-मून के उप प्रवक्ता फरहान हक से पूछा गया था कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की उस टिप्पणी पर संयुक्त राष्ट्र का क्या रुख है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान को कश्मीर से जुडा अपना सपना छोड देना चाहिए क्योंकि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा. इस सवाल पर हक ने कहा, ‘‘हमने भारत और पाकिस्तान के बीच की स्थिति पर एक बयान जारी किया है. मैं चाहूंगा कि आप उसे देखें.’ उनसे एक बार फिर पूछा गया कि संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान को कश्मीर का ख्वाब देखना बंद करने के लिए कहने वाली सुषमा की टिप्पणी पर कुछ भी क्यों नहीं कहा, तब हक ने जवाब में कहा, ‘‘हम महासभा में दिए गए हर भाषण पर टिप्पणी नहीं करते लेकिन हम कश्मीर की स्थिति पर टिप्पणी करते रहे हैं और जैसा कि मैंने कहा, हमने पिछले शुक्रवार को ही इसपर बयान जारी किया था.’

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की दूत मलीहा लोधी ने सितंबर माह के लिए परिषद के अध्यक्ष एवं संयुक्त राष्ट्र में न्यूजीलैंड के दूत गेरार्ड वान बोहेमन से मुलाकात की थी और परिषद की ‘अनौपचारिक चर्चाओं’ में लक्षित हमलों का मुद्दा उठाया था. उन्होंने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की-मून से भी मुलाकात की थी लेकिन बान ने भारत एवं पाकिस्तान की सरकारों से अपील की कि वे कश्मीर समेत अपने सभी लंबित मुद्दों को ‘कूटनीति एवं वार्ता’ के जरिए शांतिपूर्ण ढंग से निपटाएं.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने पिछले सप्ताह कहा था कि पाक अधिकृत कश्मीर में लक्षित हमलों के मुद्दे पर पाकिस्तान की ओर से संयुक्त राष्ट्र प्रमुख और सुरक्षा परिषद से संपर्क किए जाने को वैश्विक संस्था में कोई बल नहीं मिला. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पिछले माह संयुक्त राष्ट्र महासभा के 71वें सत्र से इतर जिन-जिन वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं की थी, उन्होंने लगभग उन सभी के समक्ष कश्मीर का मुद्दा उठाकर इस मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश की थी.

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