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सुरक्षा परिषद में भारत की उम्मीदों पर फिरा पानी

सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता हासिल करने में राह में भारत को तगड़ा झटका लगा है। यूएन की आम सभा ने इस मसले पर फैसला अगले सत्र के लिए टाल दिया है। भारत, ब्राजील, जापान और जर्मनी के ग्रुप-4 ने आम सभा के इस फैसले पर निराशा जताई है।

भारत ने जी-4 देशों के साथ आवाज बुलंद करते हुए कहा कि यह ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ है कि मौजूदा सत्र में इस मुद्दे को लेकर माहौल नहीं बनाया जा सका। संयुक्त राष्ट्र में ब्राजील के राजदूत एंटोनियो डी एग्वेर पैट्रिओटा ने जी-4 देशों की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि यूएन 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में बहुत समय से लंबित सुधारों को क्रियान्वित कराने में सफलता हासिल करने और दस दिशा में आगे बढ़ने में नाकाम रहा।

जी-4 में भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं। ये चारों देशों सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के दावेदार हैं। पैट्रिओटा ने कहा, ‘इसकी पूरी उम्मीद थी कि ठोस बातचीत की दिशा में बढ़ने का समय आ गया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यूएन की 70वीं सालगिरह इस महत्वपूर्ण विषय पर समझौते पर पहुंचने की बात ध्यान में रखते हुए महौल नहीं बना सकी।’

भारत महासभा के 70वें सत्र में सुरक्षा परिषद में सुधारों को पूरा करने के लिए जोर दे रहा था। यह सत्र इसी साल सितंबर में पूरा हो जाएगा। आम सहमति से कदम उठाते हुए महासभा ने यह फैसला किया कि सदस्य देश सुरक्षा में सुधार पर चर्चा 71वें सत्र में जारी रखेंगे जो सितंबर में शुरू होगा। जी-4 के पक्ष की जोरदार पैरवी करते हुए पैट्रिओटा ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार महासभा के एजेंडे में लंबित एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है।

उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि अगर इस प्रक्रिया का कोई मतलब है तो सदस्य देश विषय आधारित, और वास्तविक बातचीत करें। ब्राजील के राजदूत ने कहा कि यह सच्चाई है कि सुरक्षा परिषद की दोनों कैटेगरी (स्थायी और अस्थायी) में सदस्यता के विस्तार का समर्थन करने वाले सदस्य देशों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन लिखित में इसे दर्ज नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘हम जितने लंबे समय के लिए सुरक्षा परिषद में सुधार पर फैसले को टालेंगे, संयुक्त राष्ट्र को शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के उसके मुख्य कामकाज के संदर्भ में इतना ही अधिक अपयश मिलेगा। हम यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार को लेकर अब टालमटोल नहीं कर सकते।’

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