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सुलह की बातचीत के लिए एक टेबल पर आए हिंदू-मुस्लिम

फैजाबाद : बाबरी मस्जिद मसले का हल कोर्ट के बाहर करने के लिए अयोध्या में एक बार फिर से पहल शुरू हो गई है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के सदर‌ महंत ज्ञानदास के ख़ियादत‌ में सुलह के फॉर्म्यूले पर बात‌ करने के लिए उनके रिहायश्गह‌ पर अयोध्या तानाज़े से जुड़े 6 जमातों ने मीटिंग की। इस बार सबसे अहम बात यह रही कि पहली बार हिंदू जमातों के साथ मुस्लिम जमात‌ भी बातचीत के टेबल पर साथ आए और मामले को सुलझाने पर सहमति जताई।

हिन्दू महासभा के सदर‌ स्वामी चक्रपाणी ने कहा कि 1992 में जो हुआ उसमें मुसलमानों के गुनहगार न तो राम हैं और न ही हिन्दू। इसमें असली गुनहगार विहिप है। उन्होंने कहा कि फॉर्म्यूले के तहत मुताज़े पर‌ 70 एकड़ ज़मीन‌ में मंदिर की नींव रखी जाएगी। वैसे भी कोई भी मुस्लिम मंदिर के पास मस्जिद नहीं बनाना चाहेगा।

महंत ज्ञानदास ने कहा कि फॉर्म्यूला ऐसा तैयार किया जा रहा, जिससे 65 साल से चले आ रहे मसले का हल निकले और दोनों पक्षों को इंसाफ मिले। उन्होंने कहा कि इस पूरी अमल‌ में विहिप को दूर रखा जाएगा। हिन्दुओं की तरफ से निर्मोही अखाड़ा के वकील रणजीत लाल वर्मा ने कहा कि विहिप इस मुहिम से हट जाए तो मुस्लिम पक्ष खुद ही निर्मोही अखाड़ा को हिमायत‌ देने के लिए तैयार हैं।

बाबरी मस्जिद के पैरोकार हाशिम अंसारी ने खुषी जताते हुए कहा कि अब लगता है इंसाफ मिलने का समय आ गया है। बाबरी मस्जिद के नॉमिनी खालिक अहम ने कहा कि 2011 से सुप्रीम कोर्ट में अपील पड़ी है। सारे डाक्युमेंट्स का ट्रांसलेशन कराने के बाद भी सुनवाई शुरू नहीं हुई है। सुलह का ऐसा फॉर्म्यूला तैयार हो जिसपर दोनों हख मुत्मईन हो, तभी हल निकल सकता है।

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