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सुहराब उद्दीन एनकाउंटर मुक़द्दमा , तीसरे जज का दरख़ास्त की समाअत से इनकार

गुजरात हाइकोर्ट के जस्टिस बंकिम महित ने आज मुअत्तल आई पी एस ओहदेदार अभए चौड़ा समा की ज़मानत पर रिहाई की दरख़ास्त की समाअत से इनकार कर दिया। अभय सुहराब उद्दीन शेख़ फ़र्ज़ी एनकाउंटर मुक़द्दमा के कलीदी साज़िशी होने के इल्ज़ाम में क़ैद है

गुजरात हाइकोर्ट के जस्टिस बंकिम महित ने आज मुअत्तल आई पी एस ओहदेदार अभए चौड़ा समा की ज़मानत पर रिहाई की दरख़ास्त की समाअत से इनकार कर दिया। अभय सुहराब उद्दीन शेख़ फ़र्ज़ी एनकाउंटर मुक़द्दमा के कलीदी साज़िशी होने के इल्ज़ाम में क़ैद हैं। जब ये दरख़ास्त समाअत के लिए इजलास पर पेश की गई तो जस्टिस महित ने इस मुक़द्दमा की समाअत से ख़ुद को अलग थलग करते हुए कहा कि ये उन के इजलास पर पेश ना की जाए।

उन्होंने इनकार की कोई वजह नहीं बताई। अब ये मुआमला चीफ़ जस्टिस को रवाना किया गया है। क़ब्लअज़ीं जस्टिस जेड के सैयद और एम डी शाह भी ज़मानत पर रिहाई की दरख़ास्त की समाअत से इनकार कर चुके हैं। जस्टिस सैयद गुज़शता अक्टूबर में जब अभय ने हाइकोर्ट में बा क़ायदा ज़मानत की दरख़ास्त दी थी और जस्टिस शाह 18 अप्रैल को ज़मानत पर रिहाई की दरख़ास्त की समाअत से इनकार कर चुके हैं।

जस्टिस सैयद के इनकार के बाद जस्टिस के एम ठाकुर ने मुक़द्दमा की समाअत की थी लेकिन अदालत के अमला में तब्दीलीयों के बाद ये दरख़ास्त जस्टिस शाह के सपुर्द की गई थी। सी बी आई ने ये कहते हुए दरख़ास्त की मुख़ालिफ़त की है कि अगर अभय को ज़मानत पर रिहा किया गया तो वो गवाहों को धमकीयां दे सकते और शहादतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।

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