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सूखे से तड़प रहे कर्नाटक के गाँव में फ़रिश्ते का काम कर रहे हैं मुल्ला अब्दुल गफरसाब

आज के इंसान की फितरत है कि जब-जब भी वो मुसीबत में होता है तो सबसे पहले उस मुश्किल वक़्त में वो खुद को महफूज़ करता है, और जीने के लिए जो कोई चीज़ भी जरूरी हो वो ज्यादा से ज्यादा अपने पास इकठा करने में यकीन रखता है।

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दुनिया में कुछ मजहब ऐसे हैं जिनमें कहा जाता है कि उसे ऊपर वाले फल-फूल, दूध-दही,लस्सी-खीर और पानी जैसी चीजें चढाने से वो खुश होता है और हमें इन तरीकों से ही उसे खुश करना है।

लेकिन इन सब से अलग इस्लाम एक ऐसा मजहब है जो यह कहता है कि अगर तुम्हारा पडोसी भूख से मर तड़प रहा है और तुम फिर भी खुश हो तो अल्लाह तुमसे कभी खुश नहीं हो सकता। शायद यही वजह है कि एक सच्चा मुसलमान हर दिल में अल्लाह को ढूंढता फिरता है और हर चेहरे में उसे उसी का दीदार होता है।

ऐसी ही एक मिसाल है कर्नाटक के यादगीर जिले के यरलोग गाँव में रहने वाले मुल्ला अब्दुल गफरसाब। इलाके में भयंकर सूखा पड़ा होने की वजह से लोग पानी की एक एक बूँद के लिए तड़प रहे हैं और मीलों चलकर भी पानी लाने के लिए तैयार हैं। सरकार जहाँ इन गाँव वालों से मुँह फेर चुकी है और अपने मंत्रियों के उतरने के लिए हेलीपैड पर १०००० लीटर पानी बिना सोचे समझे बर्बाद करती फिर रही है वहीँ मुल्ला अब्दुल ने अपने खेत के दरवाज़े गांववालों के लिए खोल दिए हैं।

अब इस बात अल्लाह का फज़ल समझें या कुछ और लेकिन आसपास के इलाके में पड़े सूखे के बावजूद मुल्ला अब्दुल के ३.२५ एकड़ के खेत में लगे बोरवेल में अभी भी पानी आ रहा है। लेकिन इस पानी को सिर्फ अपने इस्तेमाल के लिए न रखते हुए अब्दुल ने न सिर्फ इस पानी को गाँव वालों के पीने के लिए मुहैय्या करवाया बल्कि उनकी भेड़-बकरियों और बाकी जानवरों के लिए पानी पीने के लिए एक बावली बनवा कर उनकी प्यास मिटाने का भी इंतज़ाम कर दिया। अब्दुल के खेत में किसी भी वक़्त कोई भी आकर पानी पी सकता है और बर्तन भर ले जा भी सकता है। यही नहीं अब्दुल के खेत के पानी को पडोसी किसान भी अपनी फसलों को सूखने से बचाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं l

पानी के इस तरह सभी के इस्तेमाल के लिए खोले जाने के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में अब्दुल ने कहा: “इस पानी पर तो सभी का हक़ है, सभी को इसकी जरुरत है मैं इसे अपने लिए इकठा करके कैसे रख सकता हूँ? इसे सब इस्तेमाल कर सकते हैं बस इसे बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए”

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