Friday , September 22 2017
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सृजन घोटाला : डीएम के स्टेनो सहित सात गिरफ्तार

भागलपुर : सरकारी राशि धोखाधड़ी मामले में पुलिस ने डीएम के स्टेनो प्रेम कुमार सहित सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. डीएम के स्टेनो के अलावा पुलिस ने इंडियन बैंक कर्मी अजय पांडेय, फर्जी तरीके से कंप्यूटर और प्रिंटर से बैंक स्टेटमेंट निकालने और पासबुक अपडेट करने वाले बंशीधर, नाजिर राकेश यादव व राकेश झा, सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड की वर्तमान प्रबंधक सरिता झा और सृजन के ऑडिटर एससी झा को गिरफ्तार किया है. प्रेम कुमार को उसके झौवाकोठी स्थित आवास से पुलिस ने गिरफ्तार किया.

जांच शुरू किये जाने के तीसरे दिन आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) के आइजी जेएस गंगवार ने शुक्रवार को गिरफ्तारी की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि अभी जांच जारी है और आने वाले दिनों में जिनके भी विरुद्ध साक्ष्य मिलेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. धोखाधड़ी की राशि के बारे में उन्होंने कहा कि अब तक 295 करोड़ का ही मामला सामने आया है. जांच में यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है. अभी तक धोखाधड़ी के इस माले में तीन प्राथमिकी कोतवाली (तिलकामांझी) थाने में ( कांड संख्या 494/2017, 499/2017 और 500/2017) दर्ज की गयी है.

धोखाधड़ी की राशि बैंक से वसूलने की तैयारी

इओयू के आइजी जेएस गंगवार ने कहा कि धाेखाधड़ी से निकाली गयी सरकारी राशि की बैंक से रिकवर करने के बिंदु पर विचार किया जा रहा है. इसके लिए डीडीसी को भी बुलाया गया. इस बिंदु पर कानूनी पहलू भी देखा जा रहा है.

उनका कहना है कि इसको लेकर बैंकों को नोटिस भेजा जायेगा. जिस तरह से इस धोखाधड़ी में बैंको की मिलीभगत साफ सामने आयी है, उसे देखते हुए रिकवरी भी वहीं से कराने की तैयारी की जा रही है. जिस तरह से धोखाधड़ी की राशि बढ़ती जा रही है, उसे देखते हुए अभी यह तय कर पाना मुश्किल है कि रिकवरी की राशि कितनी होगी. इस बिंदु पर बात करने के लिए कई अन्य वरीय बैंक अधिकारियों को भागलपुर बुलाया गया. उनसे इओयू और पुलिस की टीम ने पूछताछ की.

सैकड़ों करोड़ की सरकारी राशि की धोखाधड़ी का पता जिला प्रशासन को न चले इसको लेकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भीखनपुर के बंशीधर को जब पुलिस ने गिरफ्तार किया, तो उसने कई राज उगले. इसके बाद अन्य लोगों की गिरफ्तारी और जांच में आसानी हुई. बंशीधर ही है, जिसे सृजन द्वारा फर्जी बैंक स्टेटमेंट और पासबुक अपडेट करने के लिए रखा गया था. इसके लिए उसे प्रत्येक महीने सैलरी दी जाती थी.
उसने पूछताछ के दौरान बताया कि किस तरह जिला प्रशासन से बैंक स्टेटमेंट की मांग होने पर वह लैपटॉप और प्रिंटर से फर्जी स्टेटमेंट निकालता था. पासबुक को फर्जी तरीके से अपडेट करने का काम भी बंशीधर ही किया करता था. उसने पूछताछ में बैंक, कलेक्टरेट और सृजन के उन पदाधिकारियों और कर्मियों के नाम बताये जो इस धोखाधड़ी में शामिल थे.

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