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सेना का प्रमोशन में भेदभाव का आरोप, न्याय के लिए अधिकारीयों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

नई दिल्ली : लगभग 100 लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अधिकारियों का कहना है कि उनके साथ परमोशन में भेदभाव हुआ है। सेना और केंद्र सरकार के इस कदम के कारण याचिकाकर्ताओं में अन्याय की भावना पैदा हुई है, जिससे अधिकारियों का मनोबल कमजोर हुआ है, जो सेना और देश दोनों के लिए नुकसानदायक है। अधिकारियों के इस कदम से सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में आग्रह किया है कि अगर उनके साथ पदोन्नती में ऐसी ही भेदभाव हुआ और उन्हें उनका हक नहीं मिला, तो उन्हें ऑपरेशनल एरिया और युद्ध क्षेत्र में तैनात न किया जाए।
उन्होंने अपनी याचिका में दलील दी है कि जो अधिकारी ऑपरेशनल एरिया में तौनात होते हैं, उन्हें भी वैसी ही मुश्किलों को सामना करना पड़ता है जैसी की युद्ध क्षेत्र में तैनात अधिकारी को। उन्होंने सहायक नीला गोलखे के माध्यम से पूछा कि अगर हर अधिकारी को समान चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, तो फिर पदोन्नोती में भेदभाव क्यों?

इससे पहले भी भारतीय सेना के 300 से अधिक सैन्य अधिकारियों ने रक्षा मंत्रालय और आर्मी हेडक्वॉर्टर के खिलाफ प्रमोशन नीति न लागू करने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। ये सभी अधिकारी एयर डिफेंस आर्टिलेरी, सिगनल और इंजीनियर्स से संबंधित हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सैन्य अधिकारियों की ओर से केस लड़ रहीं वकील नीला गोखले ने बताया कि सरकार ने अक्टूबर 2015 को कोर्ट को भरोसा दिया था कि 141 नई पोस्ट कर्नल के पद पर शुरू की जाएगी। और यह पद नए लड़ाकू हथियारों की तकनीक पर काम करने वाले नए कमांडिंग अधिकारियों को सौंपे जाएंगे। जबकि अभी तक इस पर कोई कदम नहीं उठाया गया है।

उन्होंने कहा, हम सुप्रीम कोर्ट से आग्रह कर रहे हैं कि वह इस मामले में दखल दे और सरकार को निर्देश दे कि इसकी प्रक्रिया बिना देरी किए शुरू की जाए। सैन्य अधिकारी भी यही चाहते हैं कि इस समस्या का फौरन समाधान निकले ताकि कर्नल से ब्रिगेडियर रैंक तक वैकेंसी के अनुसार प्रमोशन किया जाए।

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