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सैटेलाइट की तैय्यारी ग़ैर यक़ीनी सूरत-ए-हाल से दो-चार

वज़ीर-ए-सनअत क्रिस्चन पारा दस का कहना है कि हुकूमत नया सैटेलाइटतैय्यार करने के मंसूबे से वाबस्ता है लेकिन इस राडार सीट को डिज़ाइन करनेवाली कंपनी का कहना है कि वो हुकूमत की जानिब से मतलूबा रक़म ना मिलने के बाइस इंजीनीयर्ज़ और साईंसद

वज़ीर-ए-सनअत क्रिस्चन पारा दस का कहना है कि हुकूमत नया सैटेलाइटतैय्यार करने के मंसूबे से वाबस्ता है लेकिन इस राडार सीट को डिज़ाइन करनेवाली कंपनी का कहना है कि वो हुकूमत की जानिब से मतलूबा रक़म ना मिलने के बाइस इंजीनीयर्ज़ और साईंसदानों से महरूम हो रहे हैं।

एम डी इनामी कंपनी ने 2006 -ए-में कामयाब राडार सीट टू सैटेलाइट बनाया था और उसे ख़ला में भेजा गया था।

जिस की मदद से बादलों, ख़राब मौसम और अंधेरे के बावजूद ज़मीन और समुंद्र का जायज़ा लिया जा सकता है। नवंबर 2008 -ए‍में उन्हें चालीस मुलैय्यन डालर की लागत से नए सैटेलाइट की तामीर का ठेका दिया गया।

एम डी ए के सदर डॉन फ्रायड मैन का कहना है कि साईंसदान और इंजीनीयर्ज़ ने मतलूबा सहूलयात ना मिलने के बाइस बैरून-ए-मुल्क जान शुरू कर दिया है या कोई अच्छी जगह तलाश करने लगे हैं।

बजट के फ़ौरी बाद कंपनी ने अपने ब्यान में कहा था कि वो बजट में नए राडार सीट सैटेलाइट की तामीर केलिए रक़म मुख़तस नहीं की गई। पैसे ना होने के बाइस अपने कारकुनों से महरूम हो रहे हैं और इस सूरत-ए-हाल में इस मंसूबा की तकमील में ग़ैर यक़ीनी की सूरत-ए-हाल का शिकार हैं।

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