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सैय्यदना उम्र फ़ारूक़ रज़ी० के दिल में क़यामत के बोझ का ख़ौफ़

हज़रत असलम मोली रज़ी० बयान करते हैं कि सैय्यदना उमर फ़ारूक़ रज़ी० हराह वाक़म की तरफ़ निकले। मैं उनके साथ था। जब हम मदीना से पाँच मील के फ़ासिला पर वाकेय् सरार नामी मुक़ाम पर पहुंचे तो हम ने देखा कि आग रोशन है। सैय्यदना फ़ारूक़ आज़म रज़ी०ने फ़रम

हज़रत असलम मोली रज़ी० बयान करते हैं कि सैय्यदना उमर फ़ारूक़ रज़ी० हराह वाक़म की तरफ़ निकले। मैं उनके साथ था। जब हम मदीना से पाँच मील के फ़ासिला पर वाकेय् सरार नामी मुक़ाम पर पहुंचे तो हम ने देखा कि आग रोशन है। सैय्यदना फ़ारूक़ आज़म रज़ी०ने फ़रमाया असलम! मेरा ख़्याल है यहां रात की तारीकी ( अ‍ंधेरा) और सर्दी के सबब कोई क़ाफ़िला रुका हुआ है। फिर हम तक़रीबन दौड़ते हुए उन के क़रीब पहुंचे।

हमारी नज़र एक औरत पर पड़ी, जिस के साथ इस के बच्चे भी थे। आग जल रही थी, जिस पर हांडी चढ़ी हुई थी और बच्चे भूक से चिल्ला रहे थे। क़रीब पहुंच कर हज़रत फ़ारूक़ आज़म ने पूछा ये बच्चे क्यों रो रहे हैं?। औरत ने कहा भूक की वजह से। सैय्यदना फ़ारूक़ आज़म ने पूछा इस हांडी में क्या है?। औरत ने कहा सिर्फ़ पानी है, में दिखावे से इन बच्चों को दिलासा दे रही हूँ, ताकि ये ख़ामोश होकर सो जाएं। फिर इस ख़ातून ने कहा हमारे और अमीरुलमोमिनीन उमर के दरमियान अल्लाह तआला ही फ़ैसला करेगा। हज़रत फ़ारूक़ आज़म ने फ़रमाया भला उमर को तुम्हारी क्या ख़बर?। औरत ने कहा हमारे ख़लीफ़ा होकर उन्हें हमारी ख़बर क्यों नहीं?

ये सुनकर सैय्यदना उमर फ़ारूक़ रज़ी० मेरी तरफ़ पलटे और फ़रमाया असलम मेरे साथ चलो!। हम दौड़ते हुए आटे के गोदाम में दाख़िल हुए। हज़रत फ़ारूक़ आज़म ने आटे का एक तोड़ा निकाला, एक बड़ा घी का डिब्बा लिया और कुछ सामान ख़ुर्द-ओ-नोश लेकर मुझ से फ़रमाया इसे मेरी पुश्त पर लाद दो।

मैंने अर्ज़ किया अमीरुल मोमिनीन ! ये सामान मुझे उठाने दें। ये सुन कर सैय्यदना फ़ारूक़ आज़म रज़ी० ने फ़रमाया क्या क़यामत के दिन भी तुम मेरा बोझ उठाओगे। मैंने दोनों चीज़ें उन की कमर पर लाद दी, फिर हम दोनों तेज़ तेज़ क़दमों से चलते हुए दुबारा वहां पहुंचे।

आटा और घी दोनों चीज़ें उस औरत के सामने रख दिए। फिर कुछ आटा निकाला और फ़रमाया ऐ ख़ातून! तू आटा साफ़ कर, में तेरे लिए घी और आटे के आमीज़े से हरीरा बनाता हो।

यहां तक कि हज़रत फ़ारूक़ आज़म ने उन लोगों के लिए सब कुछ पकाया और फिर खाना बर्तन में निकाल कर ठंडा करते रहे और वो ख़ातून अपने बच्चों को खिलाती रही।

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