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सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने हेराफेरी की‍_अशोक खेमका

सीनियर आईएएस ओहदेदार‌ अशोक खेमका ने दावा किया है कि कांग्रेस सदर सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने हरियाणा के गुड़गांव जिले में शिकोहपुर गांव में 3.53 एकड़ जमीन के लिए फर्ज़ी दस्तावेज पेश किये और जमीन की कीमत भी नहीं चुकाई।

सीनियर आईएएस ओहदेदार‌ अशोक खेमका ने दावा किया है कि कांग्रेस सदर सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने हरियाणा के गुड़गांव जिले में शिकोहपुर गांव में 3.53 एकड़ जमीन के लिए फर्ज़ी दस्तावेज पेश किये और जमीन की कीमत भी नहीं चुकाई।

ज़राये के मुताबिक़ खेमका ने इल्ज़ाम‌ लगाया कि डीटीसीपी ने इस हेराफेरी में वाड्रा का साथ दिया। डीटीसीपी ने क़वानीन को ताक पर रखकर बिचौलिये की तरह काम कर रहे वाड्रा को फायदा पहुंचाने के लिए जमीन के कमर्शिय‌ल इस्तेमाल का लाइसेंस दे दिया। इसके बाद वाड्रा ने 58 करोड़ में यह जमीन डीएलएफ के बेच दी थी। खेमका यह सवाल भी उठा रहे हैं कि एक दिन नें ही 7.5 करोड़ की जमीन 58 करोड़ की कैसे हो गई।

वाड्रा-डीएलएफ डील की जांच के लिए हरियाणा सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में तीन रुक्नी कमिटी बनाई थी। इस कमिटी ने वाड्रा को क्लीन चिट दे दी और डील कैंसल करने के लिए खेमका को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। सरकार ने इस पर खेमका से जवाब मांगा था। इस पर खेमका ने 100 पन्नों की रिपोर्ट हरियाणा सरकार की बनाई तीन रुक्नी जांच कमेटी को सौंपी है।

वाड्रा और डीएलएफ के बीच हुई इस डील में हेराफेरी के इल्ज़ाम के बाद हरियाणा सरकार ने अक्टूबर 2012 में जांच कमेटी बनायी थी। खेमका ने कहा है कि वाड्रा को कांग्रेस सदर‌ सोनिया गांधी के दामाद होने की वज्ह ये फाय‌दा पहुन्चाया गया था।

रिपोर्ट में 12 फरवरी 2008 को वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से जमीन हासिल की थी और मार्च 2008 में उनकी कंपनी को कमर्शिय‌ल लाइसेंस मिल गया था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ऐसा वाड्रा को फायदा पहुंचाने के लिए किया।

अशोक खेमका ने अपनी जवाबी रिपोर्ट में कहा है कि वाड्रा ने हेराफेरी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वाड्रा ने शिकोहपुर गांव में 3.53 एकड़ जमीन खरीदने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और जमीन के लिए कोई कीमत नहीं चुकाई थी। इसके बाद एक महीने से भी कम वक़्त‌ में उन्होंने अपने असर का इस्तेमाल करते हुए कमर्शिय‌ल कॉलोनी का लाइसेंस हासिल कर भारी कमाई की।

हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी पी. के. चौधरी का कहना है कि इस जवाब का फिलहाल मुतालिया किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खेमका ने जो सवाल उठाए हैं, उन पर गौर किया जा रहा है।

वह बताते हैं कि रजिस्ट्रेशन ऐक्टर, 1908 के सेक्शन 82 के तहत गलत जानाकारी और फर्जी दस्तावेज देने पर सात सालों तक की सजा हो सकती है।

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