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सोमनाथ भारती का धावा, सबूतों की बुनियाद पर

वज़ीर-ए-क़ानून दिल्ली सोमनाथ भारती की आधी रात के धावे में शिरकत पर बरतरफ़ी के मांगों में शिद्दत पैदा होगई है। चुनांचे आम आदमी पार्टी ने इनका बचाव‌ करते हुए कहा कि मुंश्शियात और जिस्मफरोशी के रैकट के बारे में चंद सबूत हासिल होने के

वज़ीर-ए-क़ानून दिल्ली सोमनाथ भारती की आधी रात के धावे में शिरकत पर बरतरफ़ी के मांगों में शिद्दत पैदा होगई है। चुनांचे आम आदमी पार्टी ने इनका बचाव‌ करते हुए कहा कि मुंश्शियात और जिस्मफरोशी के रैकट के बारे में चंद सबूत हासिल होने के बाद आधी रात के वक़्त ये धावा किया गया था।

आम आदमी पार्टी के क़ाइद योगेंद्र यादव ने कहा कि ये उनकी पार्टी की एक ग़लती थी कि उसने सोमनाथ भारती की कार्रवाई की ताईद में मौजूद तमाम सबूतों को यकजा नहीं किया और उनका बरसर-ए-आम ऐलान भी नहीं किया। वर्ना उन्होंने किस बुनियाद पर कार्रवाई की है अवाम पर वाज़िह होजाता।

वो सी एन एन-आई बी एन पर करण थापर के प्रोग्राम डेविल्स ऐडवोकेट में शिरकत कररहे थे। उन्होंने कहा कि ग़लतफ़हमी का अज़ाला 4 , 5 दिन में होजाएगा। उन्होंने कहा कि ये यक़ीनन एक ग़लती थी। इस सवाल पर कि क्या सोमनाथ भारती ने सबूत पेश किए हैं। उन्होंने कहा कि दरहक़ीक़त इस‌ में तमाम बातों का कोई सबूत नहीं होता जिसे रियासती वज़ीर-ए-क़ानून के ख़िलाफ़ इस्तिमाल किया जा सके।

इस सवाल पर कि क्या पार्टी भारती को उनके ओहदा से बरतरफ़ करने के सिलसिले में दोहरे मेयार इख्तियार नहीं कर रही है जबकि पार्टी ने पुलिस ओहदेदारों की मुअत्तली का मांग‌ किया है। योगेंद्र यादव ने कहा कि आज़ादाना अदालती तहक़ीक़ात का नसल परस्ती के इल्ज़ामात के पेशे नज़र लेफ़टीनेंट गवर्नर पहले ही हुक्म दे चुके हैं।

उन्होंने कहा कि सोमनाथ भारती को बरतरफ़ करने के मांग‌ किए जा रहे हैं। हालाँकि उन्होंने मुंश्शियात और जिस्मफरोशी के सबूत मिलने के बाद इस मकान पर धावा किया था। इस सवाल पर कि मजिस्ट्रेट के रूबरू अफ़्रीक़ी ख़ातून ने भारती के ख़िलाफ़ बयान दर्ज करवाया है।

क्या इस बुनियाद पर उन्हें बरतरफ़ नहीं किया जा सकता। योगेंद्र यादव ने कहा कि अफ़्रीक़ी ख़ातून के अंदेशों का अज़ाला किया जाएगा। ये अफ़्रीक़ी ख़ातून का बयान है जबकि मुक़ामी शहरियों का बयान इसके बरअक्स है। इस पर कि भारती के ख़िलाफ़ सबूत सी सी टी वी के कैमरों से हासिल होसकता है। योगेंद्र यादव ने कहा कि वो ऐसी झलकियां देखना चाहते हैं जिस में सोमनाथ भारती नसली तास्सुब में या उन ख्वातीन के साथ बदसुलूकी में मुलव्वस होरहे हैं।

इस सवाल पर कि क्या गुजिश्ता हफ़्ता पार्टी के लिए मनहूस साबित हुआ क्योंकि राय सेना हिल्स‌ के क़रीब धरना दिया गया था लेकिन मुकम्मल कामयाबी के बगै़र उसे वापिस ले लिया गया। योगेंद्र यादव ने कहा कि बरसर-ए-इक्तदार रहते हुए धरना जारी रखना बहुत मुश्किल था क्योंकि इससे कई नज़रियात को जो अवाम के हैं, ठेस पहूँचती थी। नफ़रत करने वाले लोग और दूर से तमाशा देखने वाले लोग बिलकुल मुख़्तलिफ़ नज़रिया रखते हैं।

इस सवाल पर कि क्या पार्टी का मौक़िफ़ एहतिजाज से शहर की सरगर्मियां खत्म‌ होजाने के बाद कमी होती है। उन्होंने कहा कि यक़ीन के साथ ऐसा नहीं कहा जा सकता। बेशतर चयानल्स पर दिखाए गए एस एम एस पुलिस के मुताबिक‌ धरने को 70 फ़ीसद अवाम की ताईद हासिल थी। धरने का बुनियादी मक़सद ये था कि दिल्ली पुलिस हुकूमत दिल्ली के तहत होनी चाहिए।

हुकूमत दिल्ली के मांग‌ के बावजूद 5 मुलाज़मीन पुलिस को मुअत्तल नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि रियासती इंतिज़ामिया आम आदमी पार्टी का और पुलिस पर कंट्रोल मर्कज़ी हुकूमत का एक मज़हकाख़ेज़ बात है। उन्होंने कहा कि चीफ़ मिनिस्टर दिल्ली ने यौम जम्हूरिया की तक़रीब को सोवियत तर्ज़ की परेड क़रार दिया था।

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