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सोशल मीडिया:निर्भया के बलात्कारी का नाम राम सिंह था, क्या राम नाम रखना बंद हुआ?

सैफ अली खान और अभिनेत्री करीना कपूर ने अपने बेटे का नाम तैमूर अली खान पटौदी रखने के बाद सोशल मीडिया में लोग इन पर बरस पड़े।सोशल मीडिया पर एक खास तबका इस तैमूर नाम रखने पर ऐतराज जताया ।उनका तर्क है कि तैमूर एक विदेशी था और उसने हम भारतीयों का नरसंहार कर हम पर राज भी किया था।

हर बात इस्लाम को जिम्मेदार ठहराने वाले तारेक फतेह भी इस मामले में पीछे नहीं रहे। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा सैफ अली खान ने अपने बेटे का नाम तैमूर रखकर यह साबित किया है कि या तो वे जाहिल हैं या अकड़ू। वो यहीं नहीं रुके उन्होंने अगला ट्वीट करते हुए लिखा कि अपने बेटे का नाम तैमूर रखकर तुमने यह तय कर दिया है कि उसे भारतीयों का नरसंहार करने वाले से जोड़ा जाएगा।”

लेकिन सोशल मीडिया में बहुत से लोग ऐसे भी है जिन्होंने करीना और सैफ के इस फैसले में उनका साथ दिया और तार्किक तरीके से जवाब भी दिया।
ट्वीटर में अब्बास हैदर लिखते हैं– जिनको तैमूर नाम से इसलिये दिक्कत है क्योंकि उसने भारत में हमला किया वो ये भी जान ले कि निर्भया के एक बलात्कारी का नाम भी राम सिंह था। क्या उसके बाद से राम नाम रखना बंद हो गया।

फेसबुक में शंभूनाथ शुक्ला लिखते हैं- शाहरूख खान ने तो अपने बेटे का नाम आर्यन रखा है तब तो किसी मुसलमान ने जाकर नहीं कहा कि उन्होंने अपने बेटे का नाम संस्कृत मूल का क्यों रखा। उस्ताद अमजद अली खान ने भी अपने बेटे का नाम आर्यन रखा था। इसलिए नाम पर राजनीति नहीं ही हो तो बेहतर। हर एक को अपना नाम बदलने और अपने बेटे का नाम अपने तईं रखने का हक है। सैफ-करीना को भी यह हक मिलना चाहिए।

फेसबुक में ही पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव लिखते हैं-
2002 में गुजरात में क्या हुआ था, उसके विवरण कई जगह पढ़ते हुए जब पहली बार यह पढ़ा कि कुछ बच्चों को गर्भ से निकाल कर मार दिया गया तो सहज विश्वास नहीं हुआ था। आज भी यह काम अकल्पनीय लगता है। आज पहली बार लग रहा है कि हो सकता है ऐसा हुआ हो। दुनिया की सबसे खूबसूरत तस्वीर- अपने नवजात से लिपटी हुई एक माँ की तस्वीर में दाग खोजने वाले लोगों का समाज बेशक ऐसे काम कर सकता है।

यह समाज हमारी कल्पना से कहीं ज्यादा वीभत्स है भाई तैमूर… बाई द वे, आ ही गए हो तो खुद को खुशकिस्मत ही मानो वरना तुम्हारे कई बड़े भाई तो आने से पहले निपटा दिए गए इस पुण्यभूमि पर। खुश रहो कि तुम नवाब पटौदी के यहाँ जन्मे हो वरना सबको ये मौका नहीं मिलता है।

वेलकम टू पागलखाना, छोटे नवाब!

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