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सोहराबुद्दीन शेख के भाई का आरोप, वीएचपी नेता ने किया जानलेवा हमला

सोहराबुद्दीन शेख के भाई रबाबुद्दीन शेख फाइल फोटो courtesy - Indian express

उज्जैन (मप्र) : फर्जी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए गैंगेस्टर सोहराबुद्दीन शेख के भाई रुबाबुद्दीन शेख ने आरोप लगाया है कि उज्जैन में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के स्थानीय नेता भैरूलाल टांक और उनके समर्थकों ने रुबाबुद्दीन और उनके बॉडीगार्ड पर हमला किया है |

पुलिस के मुताबिक़ ये घटना सोमवार (31 अक्टूबर) शाम चार बजे को कुंदन यादव नामक एक टेलर के घर हुई |  रबाबुद्दीन ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वो दिवाली की बधाई देने के लिए यादव के घर गये थे | लेकिन उस इलाक़े में जाने पर वीएचपी नेता ने आपत्ति की और अपने समर्थकों के साथ उन पर हमला कर दिया | रबाबुद्दीन ने आरोप लगाया कि टैंक ने उनको और उनके गार्ड को बुरी तरह पीटा जिसकी वजह से उनका कृत्रिम पैर बाहर निकल गया | उन्होंने बताया कि उज्जैन के एक प्राइवेट अस्पताल में उनका और गार्ड का इलाज किया जा रहा है | टांक और 19 दूसरे लोगों पर हत्या की कोशिश, घर में जबरन घुसने और दंगा करना का मामला दर्ज किया गया है |  रबाबुद्दीन और टांक गोरक्षा अभियान चलाते हैं और दोनों ही को सुरक्षा के लिए पुलिस गार्ड दिया गया है |

उज्जैन के नागड़ा थाने के अंतर्गत आने वाले इलाक़े में ये घटना हुई है | नागड़ा थाने प्रमुख अजय कुमार वर्मा ने बताया कि इस  मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है |वर्मा के मुताबिक़ ये मामला संपत्ति विवाद से भी जुड़ा हुआ है| उन्होंने बताया कि यादव जिस घर में रहते हैं, टांक उस घर को खाली कराना चाहते हैं | यादव ने ये घर टांक से ही खरीदा था |  रबाबुद्दीन के इस मामले में दखल देने से दोनों पक्षों में मारपीट हुई | उन्होंने टांक द्वारा हवा में गोली चलाने की बात से इंकार किया है |

सीबीआई के मुताबिक, पुलिस निगरानी में हैदराबाद से महाराष्‍ट्र के सांगली जाते वक़्त  गुजरात एटीएस ने गैंगस्‍टर सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्‍नी कौसर बी की हत्या कर दी थी | 26 नवंबर 2005 को गांधी नगर के पास यह फर्जी एनकाउंटर हुआ था | गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री और बीजेपी नेता अमित शाह समेत मामले में कई पुलिस अधिकारी भी इस मामले में आरोपी बनाए गए थे|  सीबीआई ने शाह समेत गुजरात के टॉप पुलिस ऑफिसरों के खिलाफ साल 2012 में जांच शुरू की थी|  मुंबई की एक कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि शाह को राजनीतिक कारणों से फंसाया गयाउनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है | जिसके बाद इस केस में 2014 में शाह को आरोपमुक्त कर दिया गया था |

रुबाबुद्दीन ने अमित शाह को बरी किए जाने के अदालत के फैसले ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी | लेकिन कुछ समय बाद रुबाबुद्दीन ने ये याचिका वापस ले ली थी |

 

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