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स्कूलों में दोपहर के खाने की स्कीम में घेटाले

रियासती हुकूमत की तरफ से सरकारी उर्दू मदारिस में बच्चों के लिए शुरू करदा दोपहर के खाने की स्कीम में ज़िला बीदर में बड़े पैमाने पर घेटालें की शिकायात मौसूल हुई हैं।

रियासती हुकूमत की तरफ से सरकारी उर्दू मदारिस में बच्चों के लिए शुरू करदा दोपहर के खाने की स्कीम में ज़िला बीदर में बड़े पैमाने पर घेटालें की शिकायात मौसूल हुई हैं।

ज़िला में वाक़्ये सरकारी मदारिस में तलबा की तादाद बिलकुल ना होने के बराबर है। कई मदारिस एसे हैं जहां तलबा की तादाद कम है और गै़रज़रूरी तौर पर टीचर्स हैं।

कई मदारिस में एडमीशन रजिस्टर में फ़र्ज़ी नामों को दर्ज करके तलबा की तादाद में इज़ाफ़ा ज़ाहिर किया जा रहा है। दोपहर के खाने की स्कीम के तहत अनाज, तेल और दुसरे अशीया भारी मिक़दार में अलॉट करवाया जा रहा है।

कई मदारिस में तलबा के हिसाब से टीचर्स की तादाद ज़्यादा है। फ़र्ज़ी तलबा के नामों को रजिस्टर में दर्ज करके दोपहर के खाने की स्कीम के तहत भारी मिक़दार में अनाज, तेल और पकवान ग़ियास और दुसरे अशीया हासिल करके मदारिस के ज़िम्मेदारों और महिकमा तालीमात के ओहदेदारों की मिली भगत से सरकारी मदारिस में बड़े पैमाने पर घेटाले चल रही हैं।

एसे मदारिस जहां तलबा की तादाद ना होने के बराबर है। रोज़ाना हाज़िर रहने वाले तलबा की तादाद में 75 फ़ीसद तलबा के फ़र्ज़ी नामों को हाज़िरी रजिस्टर्ड में दर्ज किया गया है और तलबा की तालीम पर भी तवज्जा नहीं दी जाती।

इस तरह सरकारी मदारिस में तालीमी निज़ाम नाक़िस होगया है। हुकूमत की तरफ से उन मदारिस को सहूलयात फ़राहम हैं, इसके बावजूद भी टीचर्स की लापरवाही और खरब तालीमी निज़ाम के सबब लोग अपने बच्चों को सरकारी मदारिस में शरीक करवाने के बजाय भारी फ़ीस अदा करके ख़ानगी मदारिस में दाख़िल करवाने को तर्जीह दे रहे हैं, क्यूंकि सरकारी मदारिस में अपने बच्चों को दाख़िल करके उनका मुस्तक़बिल तारीक करना नहीं चाहते।

अवाम में पैदा इस रुजहान को ख़त्म करना हो तो हुकूमत खासतौर पर महिकमा तालीमात के आला ओहदेदारों को चाहीए कि तमाम सरकारी मदारिस का दौरा करके तफ़सीली जायज़ा लिया जाये और सरकारी मदारिस में तालीमी मयार को बेहतर बनाने के लिए सख़्त इक़दामात किए जाएं।

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