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स्कॉलरशीप हड़पने के लिए स्कूल के साथ-साथ गांव भी फर्जी बना दिए

पटना : पटना जिले में प्री मैट्रिक स्कॉलरशीप घोटाला का सच एक-एक कर सामने आने लगा है। जालसाजों ने वैसे स्कूलों के नाम पर पैसा ले लिया, जिनका नामोनिशान ही नहीं है। जिस गांव में स्कूल का पता दिया, वह भी फर्जी निकला। ज़मीन पर स्कूल का अता-पता नहीं और स्कॉलरशीप की रक़म खाते में भेज दी गई। बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का चला पता. जिला प्रोजेक्ट ऑफिसर के दस्तखत से स्कॉलरशीप के लिए जो डिमांड भेजी गई थी और जिला बोह्बुद की तरफ से खाते में रक़म भेजी गई, उन स्कूलों की जांच में अबतक बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का पता चला है।

साल 2014-2015 में प्री मैट्रिक स्कॉलरशीप मंसूबा के लिए डीपीओ के दस्तखत से स्कूलों की लिस्ट व डिमांड जिला बोह्बुद ओहदेदार को भेजी गई थी। इसमें एमएस सरेन, मसौढ़ी, यूएमएस समनपुरा, मसौढ़ी, एमएस देवकी टोला धनरुआ, आदर्श एमएस सुरैया बख्तियारपुर, गवर्नमेंट श्रीमती सुंदरी देवी यूएम विद्यालय रुपस महाजी, बख्तियारपुर वगैरह स्कूलों के नाम थे। इन स्कूलों के बारे में भास्कर ने पड़ताल की तो पता चला कि सरेन और समनपुरा नाम का कोई गांव उस ब्लाक में नहीं है। वहीं धनरुआ में भी एमएस देवकी टोला नाम से कोई स्कुल नहीं है और देवकी टोला नाम का कोई गांव भी नहीं है। इसकी पुष्टि मसौढ़ी और धनरुआ के बीईओ ने की है। जबकि बख्तियारपुर महाजी में सुंदरी देवी हाई स्कुल है, लेकिन सुंदरी देवी यूएम स्कुल नाम से कोई स्कूल नहीं है और आदर्श एमएस सुरैया नाम से भी कोई स्कुल नहीं है।

फर्जीवाड़े का सच 11 मार्च, 2016 को तब सामने आया, जब एक सख्श एग्जीबिशन रोड वाके कारपोरेशन बैंक में पैसा निकालने पहुंचा। उसे 6 लाख रुपए निकालने थे। जिस स्कूल के खाते से रकम निकालनी थी, उसमें महज़ 800 रुपए थे। पहले ही किसी ने उस खाते से रक़म निकाल ली थी। इस पर बैंक मुलाजिम को शक हुआ। चूंकि रक़म स्कॉलरशीप की थी, इसलिए इसकी इत्तिला जिला कल्याण पदाधिकारी को दी। फिर पुलिस को। इससे पहले बैंक के गार्ड ने उस सख्श और उसके साथ के तीन लोगों को पकड़ लिया।

स्कॉलरशीप घोटाले की फाइल जिला तालीम दफ्तर से गायब हो गई है। माना जा रहा है कि उसी फाइल में स्कूलों और ब्लाक तालीम ऑफिसर की तरफ से भेजी गई स्कॉलरशीप की ऑरिजनल लिस्ट थी। लिस्ट के नहीं मिलने से जांच मुतासिर हो रही है। फाइल की तलाश के लिए मजिस्ट्रेट की तरफ से इन्वेंट्री तैयार कराई जा रही है। इन्वेंट्री तकरीबन तैयार है। एक-दो दिनों में उसे जांच टीम को सौंपा जाएगा। फिर उस लिस्ट का मिलान जिला कल्याण में भेजी गई लिस्ट से होगा, जिसके बुनियाद पर स्कॉलरशीप की रक़म मुताल्लिक खाते में भेजी गई है।

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