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स्वामी विवेकानन्द का पैग़ाम: मोदी

स्वामी विवेकानन्द के कायनाती उखुवत के पैग़ाम की याददहानी करते हुए वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि उन के पैग़ाम पर तारीख़ ने अगर अमल किया होता तो अमरीका में 11 सितंबर जैसे तबाहकुन वाक़ियात पेश ना आते।

स्वामी विवेकानन्द के कायनाती उखुवत के पैग़ाम की याददहानी करते हुए वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि उन के पैग़ाम पर तारीख़ ने अगर अमल किया होता तो अमरीका में 11 सितंबर जैसे तबाहकुन वाक़ियात पेश ना आते।

वज़ीर-ए-आज़म ने कहा कि इन का पैग़ाम शिकागो में 11 सितंबर 1893 में मुनाक़िदा आलमी मज़ाहिब की पार्लियामेंट‌ से ख़िताब करते हुए दिया गया था जिस ने रूहों को झिंझोड़ दिया था।

उन्होंने कहा कि 11 सितंबर के बारे में दो नज़रियात हैं। एक 2001 में तबाही का तसलसुल और दूसरा 1893 का स्वामी विवेकानन्द का आलमी उखुवत का पैग़ाम अगर हम ने स्वामी के पैग़ाम पर अमल किया होता तो तारीख़ को 11सितंबर 2001 जैसी अमरीका में तबाहकुन कार्रवाई देखना ना पड़ता।

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने दुनिया भर की तवज्जे हमारी मालामाल तारीख़ और मुस्तहकम सक़ाफ़्ती बुनियादों की तरफ़ मबज़ूल करदी थी। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द की तक़रीर के इक़तिबासात भी सुनाए और कहा कि मज़ाहिब की पार्लियामेंट‌ से 1893 में स्वामी विवेकानन्द ने ख़िताब करते हुए कहा था फ़िर्कापरस्ती, बेवफ़ाई और होलनाक विरसा-ए-, जुनून ये तमाम एक अर्से से इस ख़ूबसूरत दुनिया को गिरिफ़त में लिए हुए हैं। अक्सर तशद्दुद होता है और इंसानी ख़ून बहता है। तमद्दुन तबाह होते हैं और पूरी पूरी कौमें मायूसी का शिकार होजाती हैं।

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