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स्विटजरलैंड के लोगों ने सरकार की मुफ्त सेलरी की पेशकश ठुकराई

Voters and supporters gather at the get-together of the promoters of the initiative for an unconditional basic income in Basel, Switzerland, Sunday, June 5, 2016. Switzerland is holding the world’s first nationwide vote on introducing an unconditional basic income. The initiative was clearly rejected by Swiss voters. (Alexandra Wey/Keystone via AP)

जिनेवा : अगर किसी को घर बैठे हर महीने सरकार की तरफ से बंधी-बंधाई सेलरी मिले तो कौन काम करना चाहेगा? लेकिन एक ऐसा मुल्क है जिसके नागरिकों ने सरकार की इस शानदार पेशकश को ठुकरा दिया है। दुनिया के अमीर देशों में से एक स्विट्जरलैंड के नागरिकों ने सरकार की मुफ्त सेलरी की पेशकश ठुकरा दी है। स्विट्जरलैंड की सरकार ने मुफ्त सेलरी देने को लेकर एक जनमतसंग्रह कराया है जिसके पक्ष में 23 फीसद जबकि प्रस्ताव के विरोध में 77 फीसद लोगों ने वोटींग किया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक स्विट्जरलैंड की सरकार ने रविवार को ‘बेसिक इनकम गारंटी’ के नाम से जनमतसंग्रह कराया था। ‘बेसिक इनकम गारंटी’ के समर्थकों की मांग है कि सरकार करीब उन्हें डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा हर महीने तनख्वाह दे। गुजिश्ता करीब डेढ़ साल से यहां कुछ लोगों की तरफ से मांग की जा रही थी कि सरकार सभी को न्‍यूनतम सैलरी दे वो भी बिना कोई काम किए। इस मांग के बाद सरकार ने एक जनमत संग्रह कराया, जिसमें मुल्क के 78% लोगों ने इसे ठुकरा दिया। इसी के साथ यह प्रस्ताव खारिज हो गया। दरअसल, यहां ज्यादातर लोगों के पास काम नहीं है। फैक्ट्रियां में लोगों की जगह रोबोट ने ले ली है, जिससे मुल्क में बेरोजगारी बढ़ रही है।

अगर ये पास हो जाता तो सरकार को हर महीने देश के सभी नागरिकों और 5 साल से वहां रह रहे उन विदेशियों को, जिन्होंने वहां की नागरिकता ले ली है, उन्हें बेसिक सैलरी देनी होती। दुनिया में पहली बार है जब ऐसे किसी प्रस्ताव को किसी देश में नागरिकों के बीच रखा गया था। इस प्रस्ताव में लोगों से पूछा गया था कि क्या वे देश के नागरिकों के लिए एक तय इनकम के प्रावधान का हिमायत करते हैं या नहीं?

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