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हकूमत-ए-हिन्द ने मुझे वीज़ा नहीं दिया : यु एन‌ रीडली

हैदराबाद । 13 जनवरी अवार्ड याफ़ता बर्तानवी सहीफ़ा निगार यु एन‌ रीडली ने जो जमात-ए-इस्लामी हिंद के ज़ेर-ए-एहतिमाम गुज़िशता रोज़ हैदराबाद में मुनाक़िदा बिहार इस्लाम कान्फ़्रैंस से ख़िताब के लिए मवाव की गई थीं आज दावा किया कि हकूमत-ए-हिन्द

हैदराबाद । 13 जनवरी अवार्ड याफ़ता बर्तानवी सहीफ़ा निगार यु एन‌ रीडली ने जो जमात-ए-इस्लामी हिंद के ज़ेर-ए-एहतिमाम गुज़िशता रोज़ हैदराबाद में मुनाक़िदा बिहार इस्लाम कान्फ़्रैंस से ख़िताब के लिए मवाव की गई थीं आज दावा किया कि हकूमत-ए-हिन्द ने उन्हें वीज़ा देने से इनकार कर दिया था जिसके नतीजे में वो बिहार इस्लाम कान्फ़्रैंस से ख़िताब के लिए हैदराबाद नहीं पहुंच सकीं ।

फेसबुक के अपने सफ़ा पर पोस्ट करदा एक तहरीर में मिस‌ रीडली ने इल्ज़ाम आइद किया कि दिल्ली इजतिमाई इस्मत रेज़ि के घनोने वाक़िये के बावजूद हिंदूस्तान सियासतदानों का एहसास बेदार नहीं हुआ है । उन्होंने कहा कि हैदराबाद में 50,000 ख़वातीन से हुक़ूक़ ख़वातीन पर ख़िताब के लिए मुझे दी गई दावत के बावजूद हिंदूस्तानी हुकूमत ने वीज़ा नहीं दिया ।

मिस रीडली ने मज़ीद लिखा कि दिल्ली इस्मत रेज़ि वाक़िये से गुज़रने के बाद मेरा ख़्याल था कि हिंदूस्तानी सियासतदां ख़वातीन के मसले पर मज़ीद हस्सास होंगे लेकिन अब ये मालूम होता है कि ऐसा नहीं हुआ है । हम ख़वातीन को मुसलसल नजरअंदाज़ किया जा रहा है और हमारे साथ दूसरे दर्जे के शहरीयों जैसा सुलूक किया जा रहा है ।

यहां ये बात काबिल-ए-ज़िकर है कि यु एन‌ रीडली 2001 के दौरान खु़फ़ीया सरगर्मीयों के लिए बहैसीयत जासूसी अफ़्ग़ानिस्तान रवाना हुई थीं और तालिबान की सरगर्मीयों का पता चलाते हुए पकड़ कर यरग़माल बनालिया गया । इस मुद्दत में इस्लामी तालीमात पर तालिबान के अमल से मुतास्सिर हो कर वो मुशर्रफ़ बह इस्लाम होगई थीं जिन्हें 2003 में रहा कर दिया गया था ।

जमात-ए-इस्लामी हिंद के हैदराबाद इंचार्ज सय्यद इक़बाल रिज़वी ने कहा कि यहां बिहार इस्लाम कान्फ़्रैंस के मुख़्तलिफ़ इजलासों में मस रीडली का ख़िताब मुक़र्रर था लेकिन वीज़ा ना मिलने के सबब वो अगरचे हैदराबाद नहीं पहुंच सकीं लेकिन सहीफ़ा निगारों के इजलास से उन्होंने वीडीयो कान्फ़्रैंसिंग के ज़रीये ख़िताब किया ।

मिस रीडली ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि ज़्यादा से ज़्यादा मुस्लिम लड़के और लड़कीयां ज़राए इबलाग़ से वाबस्ता होजाएं क्योंकि इस्लाम के इख़लास के पैग़ाम को आम करने का ये एक ताक़तवर ज़रीया है । रिज़वी ने कहा कि इस कान्फ़्रैंस में 75,000 मर्द-ओ-ख़वातीन ने शिरकत की । तक़रीबन 60 मुक़र्ररीन ने इस्लाम के मुख़्तलिफ़ मौज़ूआत पर ख़िताब किया जिन में मीडीया के सर गर्दा नुमाइंदे यूनीवर्सिटीयों के प्रोफेसर्स सियास्तदान मुख़्तलिफ़ ग़ैर सियासी तंज़ीमों के नुमाइंदे भी शामिल हैं।

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