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हज़रत अबू सईद सैयद का कलाम आबशार ज़ेवर तबा से आरास्ता

उर्दू के मशहूर शायर जनाब अबू सईद सैयद मरहूम का मजमूआ कलाम आबशार ज़ेवर तबा से आरास्ता होचुका (छप चुकी) है। हज़रत सैयद का शुमार हैदराबाद के रिवायत पसंद शोरा-ए-में रहा है। चुनांचे उन के पहले मजमुए पर डाक्टर राज बहादुर ने जिस तफ़सील स

उर्दू के मशहूर शायर जनाब अबू सईद सैयद मरहूम का मजमूआ कलाम आबशार ज़ेवर तबा से आरास्ता होचुका (छप चुकी) है। हज़रत सैयद का शुमार हैदराबाद के रिवायत पसंद शोरा-ए-में रहा है। चुनांचे उन के पहले मजमुए पर डाक्टर राज बहादुर ने जिस तफ़सील से मुक़द्दमा लिखा है इस से उन की मिज़ाज शायरी की अक्कासी होती है।

गुज़शता 70 बरस में ग़ज़ल ने कई नए पैरहन से ख़ुद को आरास्ता किया और तरक़्क़ी पसंदों ने इस के मिज़ाज में कई एक तबदीलीयां की हैं। जनाब सैयद ग़ज़ल को इस के पूरे बांकपन के साथ पूनम की रात देखने के क़ाइल थे। इन की नज़र में ख़ुदाए सुख़न मीर तक़ी मीर से मख़दूम मुही उद्दीन तक का कलाम रहा, लेकिन वो बाक़ौल मख़दूम कमाल अबरवे ख़ूबाँ का बांकपन है ग़ज़ल के क़ाइल थे उन के साहबज़ादे जनाब जलील अज़हर नामा निगार सियासत ने अदब दोस्तों के लिए ये सौगात पेश की है

जो यक़ीनन साहिबान ज़ौक़ के लिए तोशा ख़ास साबित होगी। उम्मीद की जा रही है कि इसी माह के अवाख़िर में इस किताब की रूनुमाई के साथ ही ख़ुशज़ौक़ क़ारईन के लिए ये किताब तोहफ़ा गुल साबित होगी। मौसूफ़ के दोस्त-ओ-अहबाब उन के फ़र्ज़ंद जलील अज़हर से 9849172877 पर रब्त क़ायम करसकते हैं।

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