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हज अख़राजात में 30 हज़ार रुपये इज़ाफ़ा

हज 2015 के अख़राजात में मजमूई एतेबार से 30 हज़ार रुपये का इज़ाफ़ा होगा। हज 2015 में हज बैतुल्लाह की अदायगी के ख्वाहिशमंदों के लिए ये ख़बर अफ़सोसनाक साबित होगी लेकिन ये हक़ीक़त हैके मर्कज़ी हज कमेटी ने 30हज़ार रुपये फी कस इज़ाफे का तक़रीबन फ़ैसला करल

हज 2015 के अख़राजात में मजमूई एतेबार से 30 हज़ार रुपये का इज़ाफ़ा होगा। हज 2015 में हज बैतुल्लाह की अदायगी के ख्वाहिशमंदों के लिए ये ख़बर अफ़सोसनाक साबित होगी लेकिन ये हक़ीक़त हैके मर्कज़ी हज कमेटी ने 30हज़ार रुपये फी कस इज़ाफे का तक़रीबन फ़ैसला करलिया है।

मर्कज़ी हज कमेटी की तरफ से मुतय्यन करदा दोनों ज़मरों अज़ीज़ ये और ग्रीन में मजमूई एतेबार से 30हज़ार रुपये के इज़ाफे का फ़ैसला किया गया है। हज 2014 के लिए अज़ीज़ ये की क़ीमत एक लाख 65 हज़ार रुपये थी और ग्रीन ज़मुरा के लिए एक लाख 91हज़ार रुपये वसूल किए जा रहे थे लेकिन इस साल ग्रीन ज़मुरा के लिए 2 लाख 25 हज़ार रुपये वसूल किए जाऐंगे जबकि अज़ीज़ ये ज़मुरा के लिए अख़राजात एक लाख 90 हज़ार तक पहुंच जाऐंगे। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से हज सब्सीडी की बर्ख़ास्तगी के अहकामात और 10 साल के दौरान बतदरीज सब्सीडी बरख़ास्त करने की हिदायत के बाद मर्कज़ी हज कमेटी ने ये फ़ैसला किया है।

बताया जाता हैके फ़िज़ाई किराये में 7 हज़ार रुपये तक का इज़ाफ़ा होगा और पिछ्ले साल की मुनासबत से इस मर्तबा बैरूनी ज़र-ए-मुबादला में आई तबदीली के सबब रियाल की क़ीमत में हुए इज़ाफे के सबब 17हज़ार रुपये का बोझ आइद होने का इमकान है। इसी तरह मर्कज़ी वज़ारत-ए-ख़ारजा ने आज़मीन-ए-हज्ज को दो सूटकेस फ़राहम करने का जो फ़ैसला किया है उसकी क़ीमत के तौर पर मर्कज़ी हज कमेटी 7 हज़ार रुपये फ़ी आज़िम हज वसूल करेगी। हज 2015 के लिए मुकम्मिल अख़राजात को क़तईयत दे दी गई है इस का बाज़ाबता एलान अंदरून दो यौम कर दिया जाएगा।

कन्वीनर हैदराबाद फ़िज़ाई मर्कज़ बराए हज अबदुलहक़ रुकन मर्कज़ी हज कमेटी ने सियासत से ख़ुसूसी बातचीत के दौरान इस बात की तौसीक़ की है के जारीया साल हज बैतुल्लाह के अख़राजात में 30 हज़ार तक इज़ाफा होगा और इस इज़ाफे की वजह सुप्रीम कोर्ट की तरफ से 2012 में जारी करदा सब्सीडी की बतदरीज बर्ख़ास्तगी के अहकामात हैं।

उन्होंने बताया कि हज 2014 में आज़मीन-ए-हज्ज से बतौर फ़िज़ाई किराया 35 हज़ार रुपये वसूल किया गया था जोकि 7 हज़ार रुपये हज 2013 से इज़ाफ़ी था। इसी तरह इस मर्तबा हज 2015 में फ़िज़ाई किराये में 7 हज़ार रुपये इज़ाफ़ा करते हुए उसे 42हज़ार रुपये किया गया है। फ़िज़ाई किराये में सात हज़ार रुपये के इज़ाफे को मर्कज़ी वज़ारत-ए-ख़ारजा, मर्कज़ी हज कमेटी और मर्कज़ी वज़ारत शहरी हवाबाज़ी की तरफ से क़तईयत दे दी गई है। तमाम उमोर बिलख़सूस आज़मीने हज्ज के लिए रियाल की क़ीमत के ताय्युन के सिलसिले में भी क़तईयत पा चुके हैं। वाज़िह रहे के 2012 में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से हज सब्सीडी की बतदरीज बर्ख़ास्तगी के अहकामात के बाद से हज कमेटी से रवाना होने वाले आज़मीन के फ़िज़ाई किरायों में जुमला 14 हज़ार रुपये का इज़ाफ़ा हुआ है।

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