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हज के तर्बियती कैंप से ओलमा व दानिश्वरान का खिताब

बिहार रियासती हज कमेटी के जेरे एहतेमाम हज तर्बियती कैंप का इंकाद मौरखा 15 जून को हज भवन के जमात खाना में किया गया। इस प्रोग्राम का आगाज कारी मोहम्मद दानिश इमाम व खतीब हज भवन बिहार रियासती हज कमेटी की तिलावत कुरान से हुआ, और नातिया कल

बिहार रियासती हज कमेटी के जेरे एहतेमाम हज तर्बियती कैंप का इंकाद मौरखा 15 जून को हज भवन के जमात खाना में किया गया। इस प्रोग्राम का आगाज कारी मोहम्मद दानिश इमाम व खतीब हज भवन बिहार रियासती हज कमेटी की तिलावत कुरान से हुआ, और नातिया कलाम मुफ़्ती मुजीबुर्रहमान क़ाज़ी इमारते शरिया ने पेश किया। वज़ीर अक्लियती फ्लाह नौशाद आलम ने खिताब करते हुये कहा की ये सफर बेहतर इबादत का सफर है इस सफर में तैयारी की ज़रूरी है आज हम लोग इस पाक महफिल में बैठ कर तर्बियती प्रोग्राम को अच्छे तरीके से अपने दिल व दिमाग पर उतारना अप लोगों से यही गुज़ारिश है के आप वहाँ जाएँ हमारे लिए उम्मत मुसलमा के लिए दुआ करें और इस्लाम व मुसलमान को अल्लाह अपने हिफ़्ज़ व ईमान में रखे। बिहार रियासती हज कमेटी के चेयरमैन मौलाना अनिशुर्रहमान कासमी ने सदारती खिताब करते हुये तर्बियती प्रोग्राम में आज़मीन हज से मुखातिब होकर कहा की आप ऐसी जगह जा रहे हैं वो जगह बहुत ही मुबारक है और इस जगह के लिए आप को मुंतखिब किया गया है ये सफर आसान नहीं है मगर इस के फ्रायज नमाज़ से आसान है, नमाज़ के 13 फ्रायज हैं वहीं दूसरी तरफ हज के 3 फ्रायज हैं, तवाफ ज़ियारत, व्क़ौफ अरफा, एहराम बांधना, ये तीन फ्रायज को ध्यान में रख कर आसानी के साथ हज अदा किया जा सकता है, उन्होने कहा की वहाँ 6 मुकामात ऐसे हैं जिस जगह पर अरकान की अदायगी करना वाजिब है वो हैं सफा मरवाह की सई, मुजदलफ़ा की रात में वहाँ सुबह सादिक़ के बाद ठहरना। रमी 9 जिलहिजा को, आखिर में उन्होने सफर हज से मुतल्लिक़ पटना हज भवन से ले कर जेद्दा तक के दुश्वारीयों के बारे में तफ़सीली बातें बताएं और कहा की ये सफर तकलीफदेह होने के बावजूद सब्र होना चाहिए तभी आप का सफर कामयाब होगा।

मुफ़्ती साहिल अहमद कासमी मुफ़्ती इमारते शरिया ने जमा पर तफ़सीली कुरान व हदीस की रौशनी में हज से मुतल्लिक़ बहुत सारी मुफीद बातें तजुरबात व मुशाहीदात की रोशनी में आजमीन हज से कीं, उन्होने मस्तूरात को भी उनके हज के दौरान आने वाली दुश्वारीयां और उनके हल से मुतल्लिक़ कार आमद बातें बयान किए और कहा की हज हर हालत में करना वाजिब है मगर कुछ अरकान को इस दौरान छोड़ दिया जाता है।

इमाम व खतीब हज भवन मोहम्मद दनिश कासमी ने हज व उमराह से मुतल्लिक़ तफ़सीली गुफ़्तुगु करते हुये फरमाया की मेरे भाई सब से पहले आप अपनी नियत की इसलाह करें यानि अपने अंदर एखलास पैदा करें।

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