Friday , October 20 2017
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हज कैंप के लिए जगह की तलाश , हज हाउज़ में जगह को किराया पर देने के बाद मुश्किल सूरत-ए-हाल

आंधरा प्रदेश रियासती हज कमेटी के तवस्सुत (जरिये)से हज बैत उल्लाह के लिये रवाना होने वाले आज़मीन हज के लिये हज कैंप का एनइक़ाद कहां अमल में आएगा ? हज हाउज़ में मौजूद ख़ाली जगहों बिलख़सूस बालाई मंज़िलों पर जहां आज़मीन हज दौरान हज कैंप क़ियाम किया करते थे उन जगहों को भी कराए पर दे दीए जाने के सबब हज कमेटी इस तज़बज़ब (परेशानी)का शिकार है कि आख़िर हज कैंप का एनइक़ाद किस मुक़ाम पर क्या जाय !

हज कमेटी की जानिब से हज हाउज़ से हज कैंप की मुंतक़ली का भी संजीदगी से जायज़ा लिया जाने लगा था लेकिन अब हज कमेटी हज हाउज़ के करीब वाक़ै किसी फंक्शन हाल को हासिल करने की कोशिश कर रही है । हज हाउज़ की इमारत में नाकाफ़ी जगह की शिकायात मौसूल होने के बाद हज कमेटी ने हज हाउज़ से मुत्तसिल खुली अराज़ी पर महफ़ूज़ टेंट में आज़मीन की रिहायश के इंतिज़ामात करने शुरू कर दीए थे लेकिन अब हज हाउज़ की दूसरी जानिब वाज़िह खड्ड में तामीराती कामों के आग़ाज़ और खुली अराज़ी पर मौजूद तामीराती एशिया-ए-के सबब इस खुली अराज़ी का इस्तिमाल भी तक़रीबन गैर यक़ीनी होचुका है ।

आंधरा प्रदेश रियासती हज कमेटी के सदर नशीन-ओ-दीगर ओहदेदारों ने इस सिलसिला में रियासती वज़ीर अकलियती बहबूद से मुतअद्दिद मर्तबा मुलाक़ात भी कर चुके हैं लेकिन अब तक दोनों ही इस मसला पर कोई नतीजा पर पहुंचने से क़ासिर हैं । एक गोशा की जानिब से हज कैंप की ईदगाह मीर आलिम मुंतक़ली की कोशिश की जा रही है लेकिन एसा करना भी अब बे फ़ैज़ साबित होगा चूँकि ईदगाह मीर आलम में अब साबिक़ की तरह वसीअ-ओ-अरीज़ कुशादा अराज़ी और रास्ते नहीं हैं ।

अगर महिकमा अकलियती बहबूद , औक़ाफ़ और हज कमेटी फ़ौरी तौर पर इस मसला के हल के लिये इजलास मुनाक़िद करते हैं तो इस का हल क़बल अज़ वक़्त निकाला जा सकता है । हुकूमत आंधरा प्रदेश ने शमस आबाद इंटरनेशनल ए रिपोर्ट के करीब हज हाउज़ की तामीर के लिये 12.5 करोड़ रुपये की मंज़ूरी भी दे रखी है लेकिन ताहाल इस सिलसिला में कोई पेशरफ़्त नहीं होपाई है ।।

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