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हज हाउज़ में वाक़े अक़लीयती इदारों का रिकार्ड महफ़ूज़ नहीं

हज हाउज़ की इमारत वाक़े नामपल्ली में वक़्फ़ बोर्ड के इलावा कई दीगर अक़लीयती इदारों के दफ़ातिर मौजूद हैं लेकिन वहां मौजूद रिकार्ड ग़ैर महफ़ूज़ हो चुका है। खासतौर पर औक़ाफ़ी जायदादों से मुताल्लिक़ रिकार्ड भी ग़ैर महफ़ूज़ और ख़तरा में दिखाई दे रहा है। उस की अहम वजह वक़्फ़ बोर्ड और दीगर इदारों पर ग़ैर मुताल्लिक़ा अफ़राद और दरमयानी अफ़राद की गिरिफ़्त का मज़बूत होना है।

हालिया अर्सा में देखा जा रहा है कि वक़्फ़ बोर्ड समेत तमाम अक़लीयती इदारों के रिकार्ड तक दरमयानी अफ़राद की रसाई हो चुकी है और वो किसी भी काम के लिए बाआसानी सरकारी रिकार्ड हासिल करने के मौक़िफ़ में हैं। हज हाउज़ के अहाता में दरमयानी अफ़राद की कसीर तादाद सरगर्म दिखाई देती है जिन का ताल्लुक़ मुख़्तलिफ़ इदारों से है।

हर अक़लीयती इदारा के लिए मख़सूस अफ़राद अपनी ख़िदमात ज़रूरतमंदों को पेश करते हैं और वो रक़म हासिल करते हुए ना सिर्फ़ दफ़्तरी उमूर की अंजाम दही में तेज़ी पैदा करते हैं बल्कि दरकार रिकार्ड भी फ़राहम करते हैं। हालिया अर्सा में इस तरह के अफ़राद की सरगर्मीयों में इज़ाफ़ा हो चुका है।

एक आम ज़रूरतमंद शख़्स के हज हाउज़ की इमारत में दाख़िल होते ही दरमयानी अफ़राद किसी तरह उन से रुजू होकर मसअले की यक्सूई का लालच देते हैं। इस तरह के दफ़ातिर में दारुल क़ज़ात है जहां अवाम अपने सर्टीफ़िकेट्स के लिए रुजू होते हैं।

हुकूमत को तजवीज़ पेश की गई कि हज हाउज़ के ग्राउंड फ़्लोर पर तमाम इदारों के काउंटर्स क़ायम किए जाएं जहां एक ज़िम्मेदार अफ़्सर को मुक़र्रर किया जाए जो अवामी मसाइल की समाअत और दरख़ास्तों की वसूली अंजाम दे।

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