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हथकड़ी बंधे हुए लोगों को गोली मारना क्या एनका‍उंटर है?

यह शख्स हथकड़ियों में जकड़ा हुआ है और अपनी सीट पर बेहोश सा पड़ा है, उसके पूरे जिस्म पर खून के छींटे हैं। शख्स की यह हालत तेलंगाना पुलिस के साथ हुए एनकाउंटर में हुई। इसी एनकाउंटर में पांच मुश्तबा दहशतगर्द मारे भी गए हैं। जिंदा बचे इस

यह शख्स हथकड़ियों में जकड़ा हुआ है और अपनी सीट पर बेहोश सा पड़ा है, उसके पूरे जिस्म पर खून के छींटे हैं। शख्स की यह हालत तेलंगाना पुलिस के साथ हुए एनकाउंटर में हुई। इसी एनकाउंटर में पांच मुश्तबा दहशतगर्द मारे भी गए हैं। जिंदा बचे इस शख्स की तस्वीर मीडिया में आने पर तेलंगाना पुलिस की ज्यादती पर सवाल उठ रहे हैं।

पांच मुश्तबा दहशतगर्द तेलंगाना के नालगोंडा जिले में मारे गए थे। इन्हें 17 मेंबर्स वाली सिक्यॉरिटी टीम ने मारा। वे इन्हें एक पुलिस वैन में वारांगल जेल से हैदराबाद कोर्ट ले जा रहे थे। वारांगल से हैदराबाद कोर्ट 150 किमी. दूर है।

पुलिस का कहना है कि उनमें से एक मुश्तबा दहशतगर्द विकारुद्दीन अहमद ने उनसे हथकड़ी खोलने के लिए कहा क्योंकि उसे टॉइलट जाना था। वापस लौटने पर उसने उनसे हथियार छीनने की कोशिश की। सिक्यॉरिटी टीम का कहना है बाकियों ने भी उनसे हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। इसके बाद सिक्यॉरिटी टीम ने उन पर गोलियां चला दीं जिसमें पांच मुश्तबा दहशतगर्द मारे गए।

विकारुद्दीन अहमद पर इल्ज़ाम है कि उसने एक मुकामी दहशतगर्द तंज़ीम तहरीक-गलाबे-इस्लाम बनाया था। बाकी चार पर उसकी मदद करने का इल्ज़ाम था। वहीं विकारुद्दीन के वालिद मोहम्मद का कहना है कि उन्हें सौ फीसदी यकीन है कि यह एक फर्जी मुठभेड़ थी।

उन्होंने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है। सिविल राइट्स ऐक्टिविस्ट्स ने सवाल उठाया है कि 17 सेक्युरिटी अहलकार इन मुल्ज़िमों को बिना मारे क्यों वापस नहीं ला सके। अहम सवाल यह भी है कि इस मुठभेड़ में कोई पुलिस अहलकारो ज़ख्मी तक नहीं हुआ है।

तेलंगाना पुलिस ने इस बात से इनकार किया है कि यह मुठभेड़ गुजश्ता हफ्ते पुलिस वालों के क़त्ल से जुड़ा है। गुजश्ता हफ्ते सिमी के मुश्तबा दहशतगर्दों ने तीन पुलिस अहलकारों का क़त्ल कर दिया था । जिनमें से दो मुश्तबा हमलावर हफ्ते की रात पुलिस के हाथों मारे गए, वहीं इस लड़ाई में एक पुलिस अहलकार भी मारा गया। इसके अलावा एक ज़ख्मी पुलिस ऑफिसर की मौत मंगल के रोज़ हो गई, जिस दिन वह बाप भी बना थे।

स्टेट पुलिस चीफ अनुराग शर्मा ने साफ किया कि कल मारे गए पांचों मुश्तबा में से कोई भी सिमी या इंडियन मुजाहिद्दीन का नहीं था। शर्मा का कहना है कि जब उन्होंने पुलिस पर हमला किया तो उनके हाथ हथकड़ियों से बंधे थे।

सुप्रीम कोर्ट की हिदायत के मुताबिक इस मामले में एक एग्जिक्युटिव मैजिस्ट्रेट और अदालती जांच का हुक्म दिया गया है।

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