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हमारे मुस्तक़बिल का फ़ैसला हुकूमत के हाथ में : किंगफिशर मुलाज़मीन

नई दिल्ली 21 मार्च : किंगफिशर एयरलाईनज़ जो गुजिश्ता बहुत दिन‌ से शदीद माली नुकसान‌ का शिकार है और अब मुलाज़मीन को भी अब अपना घर चलाना मुश्किल होगया है क्यों कि अगर किसी भी मुलाज़िम को ( चाहे उसका ताल्लुक़ किसी भी कंपनी से हो) दस माह तक तनख़्वाह ना मिले तो इसके घर की हालत क्या होजाएगी ।

ये बात कोई भी समझ सकता है । अब किंगफिशर मुलाज़मीन का एक एहितजाजी इजलास होने वाला है जहां वो पुरज़ोर एहतिजाज करेंगे क्यों कि ना सिर्फ़ किंगफिशर एयर लाईन्ज़ ने उन्हें मुकम्मल तौर पर नजरअंदाज़ कर दिया है बल्कि हुकूमत भी उनके मसाइल की यकसूई में कोई दिल

अब हुकूमत को ये फ़ैसला करना होगा कि आख़िर इनका ( मुलाज़मीन) मुस्तक़बिल किया है ! । दरीं असना एक मुलाज़िम ने अपनी शनाख़्त ज़ाहिर ना करने की शर्त पर बताया कि मुलाज़मीन को गुजिश्ता साल मई से तनख़्वाहें अदा नहीं की गई हैं जिस‌ की वजह से हम शदीद माली बोहरान से दो-चार हैं लेकिन आज हम एक एहितजाजी इजलास करने पर मजबूर होगए हैं ताकि अपने मुस्तक़बिल का फ़ैसला कर सकें जो फ़िलहाल ग़ैर यक़ीनी का शिकार है ।

हम अब तक सिर्फ़ इस लिए ख़ामोश थे कि हमें उमीद‌ थी कि किंगफिशर के बुरे दिन टल जाऐंगे और कंपनी माली बोहरान से निकल कर एक बार फिर अच्छी हो जाएगी । हम ने तनख़्वाहों का मुतालिबा सिर्फ़ इस लिए नहीं किया कि हम ख़ुद भी इंतिज़ामिया पर दबाव‌ डालना नहीं चाहते थे लेकिन इंतिज़ामिया हमारी ख़ामोशी को हमारी कमज़ोरी समझ रहा है जो हम बर्दाश्त नहीं करसकते ।

मुल्क के क़ानून ने भी हमारी कोई मदद नहीं की जो इंतिहाई ग़ैर मअसर साबित हुआ है । इस मुद्दा को पार्लियामेंट में पेश किए जाने की ज़रूरत है ताकि वर्किंग क्लास की भी शनवाई होसके जिन का कोई पुरसान हाल नहीं । इस मुआमले में बयान‌ केलिए किंगफिशर के मालिक विजय‌ माल्या से बात‌ नहीं हो सका ।

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