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हम रैंबो नहीं, जो फंसे लोगों को उठा लाएं

पटना 2 जुलाई : वजीर ए आला नीतीश कुमार ने पीर को उत्तराखंड में इमदाद काम को लेकर हो रही बयानबाजी पर भाजपा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने गुजरात के वजीर ए आला नरेंद्र मोदी का नाम लिये बगैर कहा कि आजकल जिस किरदार की बहस हो रही है, हम वैसे रै

पटना 2 जुलाई : वजीर ए आला नीतीश कुमार ने पीर को उत्तराखंड में इमदाद काम को लेकर हो रही बयानबाजी पर भाजपा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने गुजरात के वजीर ए आला नरेंद्र मोदी का नाम लिये बगैर कहा कि आजकल जिस किरदार की बहस हो रही है, हम वैसे रैंबो नहीं हैं,जो वहां फंसे लोगों को उठा कर ले आएं। कुछ लोगों का मिजाज़ होता है बयानबाजी करने की। मेरे बोलने का एक सतह है और हम उससे नीचे नहीं जा सकते। वह अवामी दरबार में फरियादियों की शिकायतों का निबटारा करने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पर सियासत हो रही है। कुछ लोग दलील कर रहे हैं। उत्तराखंड तबाही में जो कुछ भी किया जा सकता था, कब-किससे की मुआवजे की बात सबकी मरजी से ख़त्म किया
किया गया। रहत फण्ड में पैसा दिया। अफसरों को भेज कर कैंप खुलवाया गया, ताकि अहंगी कायम हो। खुद उत्तराखंड के सीएम से बातचीत की। कोसी तबाही को बेहतर तरीके से संभालने का तमगा देनेवाले लोग भूल गये हैं कि उत्तराखंड बिहार का हिस्सा नहीं है। उत्तराखंड की तबाही कुदरती थी। इस पर सियासत नहीं की जानी चाहिए।

रियासत हुकूमत के खिलाफ भाजपा कायेदिनों के हमले पर नीतीश कुमार ने कहा, हमें छपास की बीमारी नहीं है। कुछ लोगों को बोलने की आदत होती है। जिन लोगों को यह बीमारी है, वे खूब बोले। हर दिन बोल भी रहे हैं। खूब छपे। इतना छपें कि एक ही पन्‍नों में 10 जगह दिखें और धीरे-धीरे लोग उनको पढ़ना छोड़ दें।

फिर वे खुद ही फोन कर बताने लगें कि हमारी खबर छपी है। बोलने में लोग यह भी भूल गये हैं कि इतना सालों का साथ रहा है। इस तरह की बयानबाजी सतही सियासत का सुबूत है। अच्छा है, जितना बोलेंगे, मेरे मन की झिझक दूर होगी। वैसे हम उन बातों का नोटिस भी नहीं लेते। कुरसी की आदत ऐसी लगी कि जमीन पर आने के बाद तकलीफ हो रहा है। एक्तेदार से हटने और कुरसी छीनने का असर दिख रहा है कि लोग धरना में भी कुरसी पर ही बैठ रहे हैं।

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