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हरियाणा: बिरयानी पुलिसिंग मामले को “शहजाद पुनावाला” ने अल्पसंख्यक आयोग में पहुंचाया

14, 19, 21 और 25 का हवाला देते हुए मानवाधिकारों का उल्लंघन.किसी भी धर्म के इंसान की धार्मिक आजादी “धारा 25”. कानूनी तरीके से पेशा या कारोबार करने की आजादी “धारा 19” का उल्लंघन.
लगातार अल्पसंख्यक और दलितों पर गो’रक्षा के नाम पर हो रहे अत्याचार से समाज भयभीत हो गया है। आए दिन गोरक्षकों की गुंडागर्दी से समाज की परेशानी बढ़ती जा रही है। इस बीच हरियाणा की बीजेपी सरकार ने बिरयानी में बीफ तलाशने का भी काम शुरु कर दिया। इस मामले में तुरंत एक्शन देखा गया, बुधवार को राष्ट्रीय अल्पसंख्य आयोग में ‘बिरयानी पुलिसिंग’ का मामला जा पहुंचा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र कांग्रेस में सचिव शहजाद पूनावाला ने इस बारे में आयोग में याचिका दायर की। शहजाद पुनावाला ने बिरयानी की जांच करवाने के फैसले को लेकर हरियाणा की बीजेपी सरकार और प्रदेश गौ आयोग के अध्यक्ष भानी राम मंगला के नापाक इरादों पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। आपको बता दें कि हरियाणा में सड़क के किनारे ठेले पर बिरयानी बेचने वालों पर बीफ के इस्तेमाल के शक के मद्देनजर बिरयानी के नूमने जमा कराए जाने की खबर सामने आई थी। शहजाद पुनावाला ने इस फैसले को सांप्रदायिक और गैरसंवैधानिक करार दिया। प्रदेश गौ आयोग के अध्यक्ष भानी राम मंगला ने मेवात के SP और पलवल व गुड़गांव के पुलिस अधिकारियों को मुस्लिम इलाकों में सड़क किनारे बिरयानी बेचने वालों की बिरयानी के नमूने जमाकर उसमें बीफ की जांच करने का आदेश दिया था।
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शहजाद पुनावाला ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को दी गई अपने याचिका में कहा- ‘क्या गौ आयोग का यह फैसला बिरयानी पुलिसिंग के द्वारा मुसलमानों को पुलिस के निशाने पर लाने की कोशिश नहीं है? क्या मुस्लिमों को बिजनेस करने का अधिकार नहीं है? हरियाणा में होटल और रेस्तरां किस लिए हैं? ऐसे वक्त में जबकि एक समुदाय “ईद-उल-जुहा” मनाने की तैयारी कर रहा है, हरियाणा सरकार ने उन्हें निशाना बनाने का फैसला क्यों किया?’ शहजाद ने कहा है कि यह फैसला भारत के धर्मनिरपेक्ष किरदार और हरियाणा के मेवात में रहने वाले लोगों के संवैधानिक बुनियादी हुक़ूक के खिलाफ है।

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