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हरेन पांडया क़त्ल मुक़द्दमा में बरी क़रार दिए गई 12 मुजरिमीन को नोटिस

नई दिल्ली, ०६ जनवरी (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने आज सी बी आई और हुकूमत गुजरात की दायर करदा अपील को क़बूल करलिया जिस में साबिक़ रियास्ती वज़ीर-ए-दाख़िला हरेन पांडया के हस्सास क़तल के मुआमले में 12 मुजरिमीन को हाइकोर्ट की जानिब से बुरी किए

नई दिल्ली, ०६ जनवरी (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने आज सी बी आई और हुकूमत गुजरात की दायर करदा अपील को क़बूल करलिया जिस में साबिक़ रियास्ती वज़ीर-ए-दाख़िला हरेन पांडया के हस्सास क़तल के मुआमले में 12 मुजरिमीन को हाइकोर्ट की जानिब से बुरी किए जाने के हुक्म को चैलेंज किया गया है।

जस्टिस पी मितवा सीवम और जस्टिस जे चलमीशोर पर मुश्तमिल बैंच ने दरख़ास्त क़बूल करने के बाद मुजरिमीन को नोटिस जारी की और इस का जवाब देने की हिदायत दी। ऐडीशनल सॉलीसिटर जनरल हरेन रावल ने सी बी आई, सीनीयर वकील एल नागेश्वर राव और वकील हेमन्त का वाही ने हुकूमत गुजरात की जानिब से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की।

तहक़ीक़ाती एजैंसी और रियास्ती पुलिस ने अपनी दरख़ास्त में कहा कि 29 अगस्त 2010 को गुजरात हाइकोर्ट ने 12 मुजरिमीन को जो बुरी करदिया है, वो ग़लत फ़ैसला है। हाइकोर्ट ने 12 मुजरिमीन को क़तल के इल्ज़ामात से बरी कर दिया था ताहम मुजरिमाना साज़िश, इक़दाम-ए-क़तल और इन्सिदाद-ए-दहशत गर्दी क़ानून के तहत मुख़्तलिफ़ जराइम के लिए माख़ूज़ करने ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को बरक़रार रखा था।

हरेन पांड्या साबिक़ वज़ीर-ए-दाख़िला गुजरात और चीफ़ मिनिस्टर नरेंद्र मोदी के क़रीबी साथी को 26 मार्च 2003 को अहमदाबाद में सुबह की चहलक़दमी के दौरान गोली मारकर हलाक करदिया गया था। सी बी आई के मुताबिक़ हरेन पांड्या को रियासत में 2002 फ़िर्कावाराना फ़सादाद का इंतिक़ाम लेने के लिए क़तल किया गया। हाइकोर्ट ने तहक़ीक़ात में ख़ामीयों पर सी बी आई पर तन्क़ीद की थी और कहा था कि मौजूदा मुक़द्दमा में दस्तयाब रिकार्ड से बख़ूबी अंदाज़ा होता है कि सी बी आई ने तहक़ीक़ात के मुआमले में कोताही का मुज़ाहरा किया है और मज़ीद काफ़ी कुछ तहक़ीक़ात की जानी चाहीए।

क़ब्लअज़ीं ख़ुसूसी पोटा अदालत ने कलीदी मुल्ज़िम असग़र अली के हलफ़िया ब्यान की बुनियाद पर तमाम मुल्ज़िमीन को वसीअ तर साज़िश का मुजरिम क़रार दिया था। असग़र अली ने 2002 फ़सादाद का इंतिक़ाम लेने केलिए मशहूर वे एचपी और दीगर हिन्दू क़ाइदीन को हलाक करने के मंसूबा का एतराफ़ किया था।

पोटा अदालत ने 12 के मिनजुमला 9 मुजरिमीन को सज़ाए क़ैद सुनाई लेकिन हाइकोर्ट ने उन्हें बरी करदिया। मुल्ज़िमीन पहले ही साढे़ आठ साल जेल में गुज़ार चुके हैं। असग़र अली के इलावा दीगर बरी किए गए मुजरिमीन में मुहम्मद रऊफ़, मुहम्मद परवेज़, अबदुल क़य्यूम शेख़ , परवेज़ ख़ान पठान उर्फ़ अतहर परवेज़, मुहम्मद फ़ारूक़ उर्फ़ हाजी फ़ारूक़ , शाहनवाज़ गांधी, कलीम अहमद उर्फ़ कलीम-उल-लाह, रिहान पट्ठा वाला, मुहम्मद रियाज़ सारीज़ वाला, अनीस माचिस वाला, मुहम्मद यूनुस सारीज़ वाला और मुहम्मद सैफ उद्दीन शामिल हैं।

सी बी आई के मुताबिक़ मुजरिमीन ने हरेन पांड्या को हलाक करने से क़बल 11 मार्च 2003 को मुक़ामी वे एचपी लीडर जगदीश तीवारी को हलाक करने की कोशिश की। एजैंसी ने दावा किया कि ये दोनों वाक़ियात एक ही साज़िश का हिस्सा हैं और इस का मक़सद माबाद गोधरा फ़सादाद अवाम में दहश्त पैदा करना था।

सी बी आई ने क़ब्लअज़ीं कहा था कि आई एस आई की ईमा पर मफ़रूर मुल्ज़िम रसूल पार्टी और मुफ़्ती सुफ़ियान पतंगया (उस वक़्त पाकिस्तान में मौजूद हैं) ने उन्हें गै़रक़ानूनी तौर पर पाकिस्तान रवाना किया जहां उन्हें ट्रेनिंग दी गई। इस मुक़द्दमा की इबतदा-ए-में रियास्ती पुलिस ने तहक़ीक़ात की लेकिन बाद में उसे सी बी आई के हवाले कर दिया गया था।

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