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हाजियों की परेशानियां दूर की जाएँ

नाज़िम इमारते शरीया व चेयरमैन बिहार स्टेट हज कमेटी मौलाना अनीसुर्राहमान कासमी इन दिनों उमराह ज़ियारत मस्जिद ए नबवी के मुक़द्दस सफर पर हैं। हुज्जाज मुक़द्दस में उमराह की अदायगी के बाद हजरत नाज़िम साहब ने हज मिशन की इंचार्ज जनाब अब्दु

नाज़िम इमारते शरीया व चेयरमैन बिहार स्टेट हज कमेटी मौलाना अनीसुर्राहमान कासमी इन दिनों उमराह ज़ियारत मस्जिद ए नबवी के मुक़द्दस सफर पर हैं। हुज्जाज मुक़द्दस में उमराह की अदायगी के बाद हजरत नाज़िम साहब ने हज मिशन की इंचार्ज जनाब अब्दुस्लाम साहब से दर्ज़ ज़ैल हम आमुर पर तबादीला ख्याल किया और हिंदुस्तानी हूज़ाज़ किराम के ताल्लुक से पेश आमद मसायल की निशानदेही की।

खाना काबा के आसपास कोई हॉस्पिटल न होने की वजह से हाजियों को हज के दौरान काफी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता है, अगर कोई हाजी बीमार पड जाता है, ज़ख्मी हो जाता है या बेहोश हो जाता है तो उसको हरम से कम से कम एक किलोमीटर दूर ले जाना पड़ता है, इसलिए हज के आयाम में और जिन दिनों में वहाँ अजदहाम ज़्यादा होता है आरज़ी तौर पर खाना काबा से क़रीब किसी हॉस्पिटल का इंतेजाम हो। हुज्जाज किराम की रिहाइश गाहों में बाथरूम की तादाद भी कम है, मुनासिब है के ग्रीन कैटेगरी के हाजियों की लिये कम से कम हाजियों पर एक बाथरूम होना चाहिए, अजिजिया कैटेगरी में भी कम अज़ कम आठ आदमियों पर एक बाथरूम होना चाहिए।

हिन्दुस्तानी हाजियों के लिए जो खादिम वहाँ होते हैं उनकी तादाद भी कम होती है। आम तौर पर अय्याम हज में हिंदुस्तान से 60 से 70 हज़ार हुज्जाज किराम बैक वक़्त तववाफ व ज्यारत की लिए मौजूद रहते हैं जिनकी खिदमत और रहनुमाई की लिए चंद खादिम होते हैं जो सारे हाजियों की बेहतर तरीके से रहनुमाई नहीं कर पाते हैं, जिससे हाजियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इस लिए ज़रूरी है के खुद्दाम की तादाद को बढ़ाया जाए, इस सिलसिला में हुज्जाज मुक़द्दस में मुकीम हिंदुस्तानियों की खिदमात भी हासिल करनी चाहिए। हज़रत नाज़िम साहब ने वहाँ मुकीम हिंदुस्तानियों से भी दरख्वास्त की के रजाकाराना तौर पर आयाम हज में एक ग्रुप बना लें और हाजियों की खिदमत करें।

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