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हामिद अंसारी की उम्मीदवारी उर्दू के तहेत‌ वफ़ादारी।!

अहमद उल्लाह ख़ान मल्ला पल्ली हैदराबाद हामिद अंसारी की उम्मीदवारीउर्दू के तहेत‌ वफ़ादारी।!

अहमद उल्लाह ख़ान मल्ला पल्ली हैदराबाद हामिद अंसारी की उम्मीदवारीउर्दू के तहेत‌ वफ़ादारी।!
यू पी ए की जानिब से हामिद अंसारी को नायब सदर जमहूरीया केलिए दुबारा उम्मीदवार बनाया जाना उर्दू अवाम केलिए निहायत ही ख़ुशी की बात है। इन की उम्मीदवारी उर्दू के तहेत‌ वफ़ादारी है। हालाँकि ममता बनर्जी और मुलाइम सिंह ने उर्दू से वफ़ादारी का मुज़ाहरा क्या होता तो हामिद अंसारी ही मलिके सदर जमहूरीया होते ।

इन की उम्मीदवारी यक़ीनी थी। मगर ममता‍ और मुलाइम दोनों ही मुस्लमानों के नाम पर सियासत तो ख़ूब करते हैं। मगर उन को आगे बढ़ता हुआ नहीं देखना चाहते ।जबकि दोनों की अलग अलग सुबाई सरकारें जो कि यूपी और बंगाल में क़ायम हैं।वो मुस्लमानों के रहमोकरम पर ही वजूद में हैं।

समाजवादी पार्टी‍ और तृणमूल कोंग्रेस जो मुस्लमानों की ज़ाहिरा वफ़ादार दिखाई देती हैं। मगर अंदर से मुस्लमानों की शदीद दुश्मन हैं। हमें हामिद अंसारी से इस लिए अक़ीदत नहीं कि वो मुस्लमान हैं बल्कि अक़ीदत इस लिए है कि वो उर्दू से गहिरी हमदर्दी रखते हैं,उर्दू के दोस्त हैं और एक उर्दू दां हैं।और वो यक़ीनन। नायाब सदर जमहूरीया के ओहदे का हलफ़ उर्दू में लेकर उर्दू के वक़ार को मज़ीद रोशन करेंगे।

यू पी असैंबली में उर्दू से वाक़िफ़ कार असैंबली मैंबरान के साथ ज़्यादती को मुलाइम सिंह के दौर-ए-हकूमत में शुरू किया गया
साजिस को मायावती और अखिलेश की हुकूमत ने भी इस को जारी रखा हुआ है। अगर कोई उर्दू दां ऐम एल ए उर्दू में हलफ़ लेता है तो इस की कोई क़दर मंजिलत नहीं।

बाद में इस को दुबारा से अंग्रेज़ी में हलफ़ लेना पड़ता है।या फिर हिन्दी में। जबकि उर्दू की पैदाइश ही उत्तरप्रदेश में हुई है।ममता सिर्फ उर्दू केलिए ऐलानात पर इकतिफ़ा किए हुए हैं।जिस का मक़सद मुस्लमानों को सयासी तौर पर इस्तेमाल कर के उन के वोटों को बटोरना है।

बहरहाल । हिंदूस्तान के 35 करोड़ उर्दू दोस्त अवाम की निगाहें हामिद अंसारी पर मर्कूज़ हींका वो उर्दू में हलफ़ लेकर उर्दू से दोस्ती का मुज़ाहरा करते हैं यूपी ए की हुकूमत उन को इस की इजाज़त देगी या यूपी असैंबली की तरह उन को दुबारा किसी और ज़बान में हलफ़ लेने पर मजबूर किया जाएगा।

फ़िलवक़्त यूपी ए की उर्दू के तेहेत‌ वफ़ादारी का अब वक़्त क़रीब आ पहुंचा। ममता और मुलाइम ने सदर जमहूरीया केलिए हामिद अंसारी की मुख़ालिफ़त करके उर्दू दुश्मनी का इज़हार किया था।इस लिए मुस्लमानों और उर्दू दां तबक़ा को उर्दू दुश्मन लीडरों से हर वक़त होशयार रहना है। हामिद अंसारी की उम्मीदवारी का खेरमक़दम इसी लिए है कि वो उर्दू दां हैं

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