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हिंदुस्तान की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं नेपाली

हिंदुस्तान नेपाल की खुली सरहद हिंदुस्तानियों के लिए दिन पर दिन परेशानी का सबब बनता जा रहा है। सरकारी और इंतेजामिया की लापरवाही की वजह से सैकड़ों एकड़ ज़मीन पर नेपालियों ने कब्जा भी जमा लिया है।

हिंदुस्तान नेपाल की खुली सरहद हिंदुस्तानियों के लिए दिन पर दिन परेशानी का सबब बनता जा रहा है। सरकारी और इंतेजामिया की लापरवाही की वजह से सैकड़ों एकड़ ज़मीन पर नेपालियों ने कब्जा भी जमा लिया है।
भिखनाठोरी में तो नो मेन्स लैंड पर कुछ माह साबिक़ नेपाली पुलिस चौकी का पक्का तामीर भी शुरू कर दिया गया था। जिसे इंतेजामिया की पहल पर फिलहाल रोका गया है। वहीं, दूसरी तरफ नेपाल से भतुजला आने वाली पानी जिससे दर्जनों गांवों के लोग अपनी प्यास बुझाते है। कई बार नेपालियों की तरफ से रोक दिया गया था। हालांकि रियासत के सरहदी जिलों व नेपाल के अफसरों के साथ हुई बैठक में आपसी अमन चैन और भाईचारा का नारा दिया गया। एक साथ मिलकर सरहदी इलाकों की तरक़्क़ी की बात की गई। बावजूद सरहदी इलाकों के लोग अपनी कारगुजारी से बाज नहीं आ रहे।
बताते हैं कि मगरीबी चंपारण जिले में सिकटा ब्लॉक से वाल्मीकिनगर तक करीब सवा सौ किलोमीटर भारत नेपाल की खुली सरहद है। सिकटा, मैनाटांड़, गौनाहा वगैरह ब्लॉक दमें तो करीब बीस पचीस फीट जमीन को दोनों मुल्कों के दरमियान नो मेंस लैंड मानकर पिलर गाड़ दिया गया है। जिसे कई जगहों पर उखाड़ा भी जा चुका है, लेकिन रामनगर और वाल्मीकिनगर इलाके में मौजूद पहाड़ियों को ही भारतीय सरहद मान लिया गया था।

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