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हिंदूस्तानी वफ़द को 40 घंटों बाद लेबनान का वीज़ा

लेबनानी हुक्काम ने आलमी मार्च बराए येरूशलम में हिस्सा लेने वाले मुवाफ़िक़ फ़लस्तीनी हिंदुस्तानी वफ़द के 37अरकान बिशमोल राक़िम को ज़ाइद अज़ 40 घंटों तक बहरी कश्ती पर अमलन महसूर कर रखने के बाद इमीग्रेशन की कार्रवाई तकमील की है जिसके बाइस

लेबनानी हुक्काम ने आलमी मार्च बराए येरूशलम में हिस्सा लेने वाले मुवाफ़िक़ फ़लस्तीनी हिंदुस्तानी वफ़द के 37अरकान बिशमोल राक़िम को ज़ाइद अज़ 40 घंटों तक बहरी कश्ती पर अमलन महसूर कर रखने के बाद इमीग्रेशन की कार्रवाई तकमील की है जिसके बाइस इनके 30 मार्च को मुनाक़िद शुदणी मार्च में हिस्सा लेने के इम्कानात जो मौहूम दिखाई दे रहे थे रोशन हो गए हैं।

हिंदुस्तानी सिफ़ारत ख़ाना के हुक्काम मुसलसल सुई के बाइस ये मुम्किन हो सका है वर्ना हिंदुस्तानी वफ़द तकरीबन मायूस हो चुका था। जहाज़ में खाने पीने की एशिया-ए-घटती जा रही थी जिससे इनकी तशवीश बढ़ती जा रही थी । हिंदुस्तानी कारवाँ के कन्वीनर मिस्टर फीरोज़ मीठी बोर वाला और मिस्टर रूह उल्लाह ने इल्ज़ाम आइद किया कि इसराईली‍ ओ‍ अमेरीकी दबाओं के आगे लेबनानी हुकूमत झुकते हुए मार्च को नाकाम बनाने के हरबे इख्तेयार करने लगी है।

सहाफ़ीयों और हक़ूक़-ए-इंसानी कारकुनों पर मुश्तमिल हिंदुस्तानी वफ़द को 246 निशस्ती स्टीमर फ़ारगन को 40 घंटों तक छोड़ने की इजाज़त नहीं दी गई है जो तुर्की में टसोको बंदरगाह से 10 घंटों का सफ़र करते हुए बेरूत के साहिल पर 27 मार्च की शब को ही लंगर अंदाज़ हो चुका था जिसमें ग्लोबल मार्च में हिस्सा लेने वाले 13 ममालिक 37 अरकान सफ़र कर रहे थे।

एक इराक़ी शहर को भी रोके रखा गया। लेबनानी हुक्काम ने इबतिदाई 8 घंटों तक किसी भी मुल्क के शहरी को ज़मीन पर उतरने की इजाज़त नहीं दी। स्टीमर के लंगर अंदाज़ होते ही लेबनान की इमीग्रेशन अथॉरिटीज़ ने वीज़ा की इजराई के लिए तमाम मुसाफिरैन के पासपोर्टस हासिल कर लिए।

लेबनानी हुक्काम ने अमेरीका, इरान, तुर्की और दीगर पड़ोसी ममालिक से ताल्लुक़ रखने वाले वफ़ूद को भी तकरीबन 8 घंटों तक जहाज़ से उतरने की इजाज़त नहीं दी जबकि उन्हें लेबनान में दाख़िल होने के लिए वीज़ा की ज़रूरत नहीं पड़ती है। लेबनानी हुक्काम ने स्टीमर में दाख़िल होकर दीगर ममालिक के शहरियों को वीज़ा-ए-फॉर्म्स ख़ाना पुरी करने के लिए हवाला किए और उन्हें जमा करते हुए वापस लौट गए।

घंटों इंतेज़ार के बाद भी वीज़ों की इजराई में ताख़ीर के लिए वफ़ूद से कोई वज़ाहत नहीं की। स्टीमर में जब वफ़ूद ने नारे लगाना शुरू किया तो इमीग्रेशन हुक्काम ने इंडोनेशियाई शहरियों को बंदरगाह में दाख़िल होने की इजाज़त दी। स्टीमर में गज़ा और पानी की ताज़ा सरबराही ना होने के बाइस बादअज़ां इरान और तुर्की के शहरियों को भी स्टीमर छोड़ने की इजाज़त दे दी गई जबकि अरदन के शहरियों को स्टीमर से बाहर निकल कर बज़रीया हवाई जहाज़ अपने मुल्क को रवाना हो जाने की इजाज़त दी गई।

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