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हिंदूस्तानी फ़िज़ाईया किसी भी चैलेंज का सामना करने तैय्यार

नई दिल्ली 9 अक्टूबर (पी टी आई) फ़िज़ाईया के सरबराह और चीफ़ मार्शल एन ए के बरूने ने कहा कि हिंदूस्तान अपनी सलामती को लाहक़ किसी भी ख़तरा और चैलेंज का सामना करने के लिए तैय्यार है। यौम फ़िज़ाईया के मौक़ा पर ख़िताब करते हुए बरूने एतराफ़ किया कि

नई दिल्ली 9 अक्टूबर (पी टी आई) फ़िज़ाईया के सरबराह और चीफ़ मार्शल एन ए के बरूने ने कहा कि हिंदूस्तान अपनी सलामती को लाहक़ किसी भी ख़तरा और चैलेंज का सामना करने के लिए तैय्यार है। यौम फ़िज़ाईया के मौक़ा पर ख़िताब करते हुए बरूने एतराफ़ किया कि हिंदूस्तान के पड़ोस में सीकोरीटी फ़िज़ा निहायत ही तशवीशनाक और अबतर है, उन्हों ने मज़ीद कहा कि सूरत-ए-हाल क़रीबी नज़र रखने के मुतक़ाज़ी होने के इलावा फ़िज़ाई चौकसी की तलबगार है। फ़िज़ाईया के 79 वें यौम तक़ारीब से ख़िताब करते हुए अर चीफ़ मार्शल ने कहा कि पड़ोसी मुल्क में सीकोरीटी सूरत-ए-हाल हमारे लिए तशवीश का बाइस है इसी लिए हमें सख़्त चौकसी करना होगा। उन्हों ने इस बात की निशानदेही की कि पड़ोस में इंतिहापसंद सरगर्मीयां मज़बूत हो रही हैं। अपने एयरफ़ोर्स डे पयाम मैं अर चीफ़ मार्शल ने कहा कि पाकिस्तान मुसलसल दहश्तगर्दी के हमलों का शिकार बन रहा है। इस मुल़्क की दाख़िली सलामती की सूरत-ए-हाल ग़ैर मुस्तहकम है। इस से ज़ाहिर होता है कि वहां इंतिहापसंद सरगर्मीयां ज़ोर पकड़ रही है। उन्हों ने ये भी कहा कि पाकिस्तान मक़बूज़ा कश्मीर में चीन की बढ़ती हुई मौजूदगी हिंदूस्तान की तवज्जा का तालिब है। उन्हों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मलिक के तमाम अहम असासा जात और तंसीबात की सलामती को यक़ीनी बनाना होगा। हमारे मालूम नैटवर्क के मुताबिक़ सलामती का मसला निहायत ही नाज़ुक बना हुआ है। हमें अपनी मालूमात में इज़ाफ़ा करते हुए इस ख़तरे से निमटने के लिए बेदार रहना होगा। इंडियन एयरफ़ोर्स लड़ाका तय्यारों की ख़रीदारी के लिए मल्टी बिलीयन डालर के मुआहिदों पर दस्तख़त करने को क़तईयत दे रहा है। ये मुआहिदे 18 अक्टूबर तक किए जाएंगी। अर चीफ़ मार्शल ने मज़ीद कहा कि अब हम मीडियम मल्टी रोल के लड़ाका तय्यारों के पराजकट को मुकम्मल करने के आख़िरी मरहले में हैं। हम आज से 10 दिन के अंदर कमर्शियल बोलियों की कुशादगी के अहल हो जाएंगी। वज़ारत-ए-दिफ़ा ने कल ही तय्यारों की ख़रीदारी और दीगर हथियारों के उसूल के लिए तिजारती बोलियों की कुशादगी के लिए राह हमवार की है। बोलियों की कुशादगी के बाद वज़ारत-ए-दिफ़ा ही इस मुआहिदे को क़तईयत देने के लिए कम से कम बोली दहिंदा से मुआहिदा किया जाएगा। बरूने ने कहा कि हिंदूस्तानी फ़िज़ाईया को असरी बनाने के प्रोग्राम को एहमीयत दी जा रही है ।

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