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हिंदू के घर से उठी मुस्लिम बेटी की डोली

मेरठ।, 5 अक्तूबर : दंगों की आग में झुलसे मुजफ्फरनगर में लोग भाई चारे की उम्मीद जगा रहे हैं वही शामली के रिटायर्ड फौजी सतेंद्र मलिक ने जुमे के दिन गांव के ही दूसरे तब्के की लड़की का न सिर्फ निकाह करवाया, बल्कि उसकी विदाई भी अपनी बेटी क

मेरठ।, 5 अक्तूबर : दंगों की आग में झुलसे मुजफ्फरनगर में लोग भाई चारे की उम्मीद जगा रहे हैं वही शामली के रिटायर्ड फौजी सतेंद्र मलिक ने जुमे के दिन गांव के ही दूसरे तब्के की लड़की का न सिर्फ निकाह करवाया, बल्कि उसकी विदाई भी अपनी बेटी की तरह अपने घर से कराई और शादी का पूरा खर्च भी खुद ही उठाया ।

शामली का कुड़ाना गांव भी दंगों की चपेट में आ गया था। इस वजह से गांव के कुछ लोग वहां से चले गए थे। गांव के ही रिटायर्ड फौजी सतेन्द्र मलिक ने अपने दोस्त रहीसु की बेटी अनवरी की शादी कराने का फैसला किया। इसमें मलिक के घर वालों ने भी उसका बखूबी साथ दिया। अनवरी की शादी मुजफफरनगर के थाना बुढ़ाना इलाके के नई बस्ती के साकिन वसीम वल्द अख्तर से 4 अगस्त को तय हुई थी। बिगड़े माहौल की वजह से जुमे के दिन दुल्हे के साथ 15 बराती कुड़ाना गांव पहुंचे और निकाह का प्रोग्राम शुरू हुआ।

इस पाक मौके पर सतेन्द्र की बीवी मनोज देवी और बेटा अनिल भी साथ में जुटे रहे। सतेन्द्र ने बारात की दावत के लिए खाने का इंतेजाम भी मज़हब के मुताबिक ही किया। निकाह के बाद जब दुल्हन को विदा करने का वक्त आया तो सतेन्द्र ने रहीसु से बेटी को अपने घर से विदा करने की बात कही। सतेन्द्र की खाहिश पर अनवरी को उसके घर से विदा किया गया।

शादी का माहौल देखकर यह कहीन करना मुश्किल था कि यह वही इलाका है, जहां पर कुछ दिन पहले मज़हब के नाम पर लोग एक-दूसरे के खून के प्यासे हो चुके थे।

————-बशुक्रिया: नवभारत टाइम्स

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