Friday , October 20 2017
Home / India / हिंद-पाक न्यूक्लियर जोखिम कम करने मुआहिदे में तौसीअ

हिंद-पाक न्यूक्लियर जोखिम कम करने मुआहिदे में तौसीअ

हिंदूस्तान और पाकिस्तान ने आज ऐलान किया कि उन्होंने न्यूक्लियर हथियारों के मुआहिदा को हादिसात से मरबूत जोखिम में कमी लाने की मुद्दत में मज़ीद पाँच साल की तौसीअ दी है। दोनों मुल्कों ने मुआहिदा की मुद्दत में तौसीअ करने का फ़ैसला किय

हिंदूस्तान और पाकिस्तान ने आज ऐलान किया कि उन्होंने न्यूक्लियर हथियारों के मुआहिदा को हादिसात से मरबूत जोखिम में कमी लाने की मुद्दत में मज़ीद पाँच साल की तौसीअ दी है। दोनों मुल्कों ने मुआहिदा की मुद्दत में तौसीअ करने का फ़ैसला किया है जिसका मक़सद न्यूक्लियर हथियारों से होने वाले वाक़ियात के जोखिम को कम कर दिया जाए।

ये मुआहिदा कल ख़तम हो गया था। ये फ़ैसला 27 दिसम्बर 2011को ईस्लामाबाद में मुनाक़िदा न्यूक्लियर एतिमाद साज़ी इक़दामात पर बाहमी माहिरीन की आला सतही मुज़ाकरात के छ्ठे दौर के दौरान किए गए इक़दामात का तसलसुल है। जमहूरीया हिंद और इस्लामी जमहूरीया पाकिस्तान के दरमयान हुए मुआहिदे के आर्टीकल 8 के मुताबिक़त में 21 फरवरी 2007 के न्यूक्लियर हथियारों से मरबूत हादिसात के जोखिम को कम करने पर ये मुआहिदा को तौसीअ दी गई है।

दोनों ममालिक ने इस मुआहिदे को आइन्दा 5 साल के लिए तौसीअ देने से इत्तिफ़ाक़ किया। नई दिल्ली में एक ब्यान में वज़ारत-ए-ख़ारजा ने ये बात बताई। ये मुआहिदा 21 फरवरी 2007 से नाफ़िज़ उल-अमल है। इबतदा में उसे पाँच साल के लिए मुक़र्रर किया गया था। इसका मक़सद न्यूक्लियर हथियारों से मरबूत हादिसात से होने वाले जोखिम को कम करना था।

पाकिस्तानी दफ़्तर वज़ारत-ए-ख़ारजा ने ईस्लामाबाद में एक अलैहदा ब्यान जारी करते हुए बताया कि हिंदूस्तान के साथ इस मुआहिदा को तौसीअ दी गई है। दिसम्बर में मुनाक़िदा बातचीत के दरम्यान हिंदूस्तान और पाकिस्तान ने दो अहम मुआहिदों को तौसीअ देने की तजवीज़ पेश की थी।

ये मुआहिदे ब्लास्टिक मीज़ाईल ( मीसाइल) के तजुर्बात की पेशगी इत्तिला और न्यूक्लियर हथियारों से मरबूत हादिसात से होने वाले जोखिम को कम करना शामिल है। दोनों जानिब मौजूदा न्यूक्लियर और रिवायती एतिमाद साज़ी इक़दामात का वसीअ तर तनाज़ुर में जायज़ा लिया और उन शोबों में इज़ाफ़ी इक़दामात के लिए तजावीज़ पर ग़ौर-ओ-ख़ौज़ किया ताकि बातचीत में पेशरफ़त को समझे।

समुंद्र में हादिसात को रोकने के लिए भी एक मुआहिदे की तजवीज़ है। दोनों मुल्कों के बहरीया के जहाज़ों के दरमयान तसादुम की सूरत में होने वाले हादिसों को रोकने के लिए मुआहिदे किए जाऐंगे। न्यूक्लियर और रिवायती एतिमाद साज़ी इक़दामात पर बातचीत गुज़श्ता साल दुबारा शुरू हुए अमन मुज़ाकरात का हिस्सा हैं।

2008 को मुंबई में दहशतगर्द हमले के बाद से ज़ाइद अज़ दो साल तक दोनों मुल्कों के दरमयान बातचीत मुअत्तल हो गई थी।

TOPPOPULARRECENT