Sunday , October 22 2017
Home / Uttar Pradesh / हिदुस्तान और हिन्दुस्तानी तभी तक महफूज है, जब तक हिंदू तबक

हिदुस्तान और हिन्दुस्तानी तभी तक महफूज है, जब तक हिंदू तबक

हिदुस्तान और हिन्दुस्तानी तभी तक महफूज है, जब तक हिंदू तबके और उसकी कल्चर महफूज है। असल तौर में जंगलों में रहने वाले 30 करोड़ जंगल के बाशिंदों को हमें जगाना है। हमें सबको जोड़ना है, हम सबको जोड़ेंगे। बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम, मोर

हिदुस्तान और हिन्दुस्तानी तभी तक महफूज है, जब तक हिंदू तबके और उसकी कल्चर महफूज है। असल तौर में जंगलों में रहने वाले 30 करोड़ जंगल के बाशिंदों को हमें जगाना है। हमें सबको जोड़ना है, हम सबको जोड़ेंगे। बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम, मोरहाबादी में मुनक्कीद एकल संगम में आरएसएस के मोहन भागवत ने ये बातें कहीं।

एकल मुहिम के 25 साल पूरे होने पर यह मुनक्कीद इस एकल संगम में उन्होंने कहा कि जहां धर्म है वहीं कामयाबी है। “वनवासियों” को जगाये बगैर भारत दुनिया का उसताज नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि इनको जगाने के लिए जमीन पर काम करना होगा। मिस्टर भागवत ने कहा कि यह काम हमें मुखालिफत या किसी तनकीद में नहीं करना है। एक कहानी सुना कर वह बोले कि करते वक्त चिढ़ाने, डराने व तिरस्कार से घबराना नहीं चाहिए। ऐसा करने वाले करेंगे, पर अपने लक्ष्य की ओर मुसलसल बढ़ते रहने से ही कामयाबी मिलेगी। संघ के सौ साल पूरे होने तक भारत माता का वैभव लौटाना है। कार्यक्रम के अध्यक्ष विकास भारती के सचिव अशोक भगत ने कहा कि गरीबों के लिए संघर्ष को कुछ लोगों ने अपनी बपौती बना ली थी. पर एकल मुहिम के तहत नौजवानों ने अहम किरदार भूमिका निभायी है. हम नफरत और व नफरत नहीं फैलाते, हम वनवासियों को उनकी ताकत का अहसास कराते हैं. धीरे-धीरे यह समाज आगे बढ़ रहा है। एक मुहिम के मरकजी केंद्रीय संगठन प्रभारी श्यामजी गुप्त ने कहा कि वनवासी किसी जाति का नाम नहीं है. हिंदुस्तान का 30 करोड़ समाज वनवासी है ये वनवासी इस्तहकाम से इंसानी बम हो गये हैं।
इनके धमाके से जो रोशनी होगी, उससे समाज रोशन होगा,। मिश्री गुप्त ने कहा कि राम लला का मंदिर बाद में बनेगा, पहले 30 करोड़ लोगों के चेहरे पर हम मुस्कान लायेंगे। कड़िया मुंडा, आर्जून मुंडा, सीपी सिंह, रवींद्र राय, दीपक प्रकाश समेत दीगर अन्य भाजपा नेता तथा राज्य भर से आये एकल विद्यालय व एकल अभियान से जुड़े हजारों कार्यकर्ता उपस्थित थे.

कार्यकर्ता हुए सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान वनवासी कल्याण, एकल विद्यालय व एकल अभियान से जुड़े समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मानित भी किया गया. सरसंघचालक मोहन भागवत ने उन्हें खुद अपने हाथों से तिलक लगा कर, श्री फल देकर व शॉल ओढ़ा कर सम्मानित किया. सम्मानित होने वालों में मेहरंग उरांव, योगेश्वर गिरि, विष्णु उरांव, संजय साहु, देवकी नंदन यादव, जीतू पाहन, लाल मोहन महतो, विरेंद्र सोरेन, सुमित्र बड़ाइक व दुबराज हेंब्रम शामिल हैं. कार्यक्रम को दौरान एकल विद्यालय के बच्चों ने पंचमुखी शिक्षा पर आधारित लघु नाटिका पेश की.
क्या है एकल विद्यालय
गत 25 वर्षो से चल रहे एकल अभियान के तहत दूरदराज के गांवों में चलने वाले उन विद्यालयों को एकल विद्यालय कहा जाता है, जहां एक शिक्षक होते हैं. ये शिक्षक ग्रामीण बच्चों को पंचमुखी शिक्षा (पारंपरिक शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, समृद्धि शिक्षा, संस्कार की शिक्षा व स्वाभिमान जागरण) देते हैं. देश में एकल विद्यालय की शुरुआत झारखंड के रतनपुर टुंडी में 1989 में हुई थी. तब यहां के 60 गांवों में एकल विद्यालय शुरू किये गये थे. आज इनकी संख्या लगभग 60 हजार हो गयी है. अगले कुछ सालों में यह तादाद एक लाख करने का इमकान है। एक मुहिम के तहत गांव के नौजवान को ओरगनिक खेती और दीगर तकनीकी जानकारी दी जाती है।

TOPPOPULARRECENT