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हिन्दुस्तान दूसरों के दाख़िली उमोर में मुदाख़िलत का मुख़ालिफ़

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की जनरल असेम्बली में रुकन पार्लियामेंट सतीश चन्द्र मिश्रा की तक़रीर

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की जनरल असेम्बली में रुकन पार्लियामेंट सतीश चन्द्र मिश्रा की तक़रीर

हिन्दुस्तान ने कहा कि किसी भी मुल्क के दाख़िली उमोर में ग़ैर मिजाज़ मुदाख़िलत और किसी भी तनाज़े में ताक़त का इस्तेमाल और माबाद झड़प सूरत-ए-हाल में ताक़त के इस्तेमाल से गुरेज़ किया जाना चाहीए। हिन्दुस्तान किसी भी ग़ैर मिजाज़ मुदाख़िलत और झड़प या इस के बाद ताक़त के इस्तेमाल का मुख़ालिफ़ है। उन्होंने कहा कि क़ानूनी उसोलों की हुक्मरानी की पाबंदी करते हुए और अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के रुकन ममालिक के दरमियान तमाम सतहों पर ज़्यादा बाहमी तआवुन के ज़रीये इस बात को यक़ीनी बनाया जा सकता है कि बैन-उल-अक़वामी ताल्लुक़ात में ताक़त का इस्तेमाल ना किया जाये और तमाम बैन-उल-अक़वामी तनाज़आत की पुरअमन यकसूई की जाये।

हिन्दुस्तानी पार्लियामेंट के अक़वाम-ए-मुत्तहिदा का दौरा करने वाले रुकन सतीश चन्द्र मिश्रा कल अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की जनरल असेम्बली के इजलास से क़ौमी और बैन-उल-अक़वामी सतहों पर क़ानून की हुक्मरानी के मौज़ू पर ख़िताब कररहे थे। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान तमाम सियासी एतबार से आज़ाद ममालिक की ख़ुदमुख़तारी और यकजहती का पर ज़ोर हामी है। हम किसी भी मुल्क के दाख़िली उमोर में ग़ैर मजाज़ मुदाख़िलत या किसी भी झड़प में या झड़प के बाद के हालात में ताक़त के इस्तेमाल के मुख़ालिफ़ हैं। जनरल असेम्बली के गुज़िश्ता इजलास में मुमलकतों के सरबराहों और हुकूमतों के सरबराहों में एक क़रारदाद मंज़ूर की थी।

ये एक नतीजाख़ेज़ आलामीया था जो क़ानून की हुक्मरानी के मौज़ू पर था। ये दस्तावेज़ असरी, सियासी, समाजी और मआशी हालात का जायज़ा लेती है और क़ानून के उसोलों की हुक्मरानी के नफ़ाज़ पर ज़ोर देती है ताकि बैन-उल-अक़वामी अमन-ओ-सलामती की बरक़रारी का मक़सद हासिल किया जा सके। बकाए बाहम, सनफ़ी इंसाफ़ और तरक़्क़ी बहाल की जा सके। मिश्रा ने कहा कि ये दस्तावेज़ सयान्ती कौंसल में इस्लाहात की मुसलसल कोशिशों की एहमीयत पर ज़ोर देती है। हम इस बात को ज़रूरी समझते हैं कि सलामती काउंसल में मुम्किना हद तक जल्द अज़ जल्द इस्लाहात की जाएं ताकि ये इदारा वसिअतर नुमाइंदा , मोस्सर और शफ़्फ़ाफ़ इदारा बन सके।

उन्होंने कहा कि ये हमारा सोचा समझा नुक्ता-ए-नज़र है कि बैन-उल-अक़वामी तनाज़आत की पुरअमन ज़राए से यकसूई को आला तरीन तर्जीह दी जानी चाहीए ताकि बैन-उल-अक़वामी अमन-ओ-सलामती की बरक़रारी का मक़सद हासिल होसके। उन्होंने कहा कि आज़ाद अदलिया, मोस्सर और शफ़्फ़ाफ़ अदालती निज़ाम और तमाम अफ़राद की निज़ाम इंसाफ़ तक मुसावियाना रसाई क़ानून की हुक्मरानी को फ़रोग़ देने के लिए लाज़िमी है। हिन्दुस्तान की ग़ैर जांबदारी उसकी आज़ादी के वक़्त से ही एक मुस्लिमा हक़ीक़त है। तारीख़ आलम शाहिद है कि हिन्दुस्तान ने बला लिहाज़ वाबस्तगी ज़ालिम की मुख़ालिफ़त और मज़लूम की हिमायत की है।

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