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हिन्दू आर्टिस्ट के नक़्श करानी मसाजिद की ज़ीनत

हैदराबाद ।२२‍ अप्रैल (एजैंसीज़) आर्टिस्ट अनील कुमार चौहान गुज़शता साल से ज़ाइद अर्सासे मसाजिद में क़ुरआन मजीद की आयात नक़्श करने की ख़िदमात अंजाम दे रहे हैं। ये काम वो पूरे इन्हिमाक से अंजाम देते हैं। अनील कुमार चौहान ने गुज़शता

हैदराबाद ।२२‍ अप्रैल (एजैंसीज़) आर्टिस्ट अनील कुमार चौहान गुज़शता साल से ज़ाइद अर्सासे मसाजिद में क़ुरआन मजीद की आयात नक़्श करने की ख़िदमात अंजाम दे रहे हैं। ये काम वो पूरे इन्हिमाक से अंजाम देते हैं। अनील कुमार चौहान ने गुज़शता पंद्रह बरसों के दौरान हैदराबाद-ओ-सिकंदराबाद और क़रीब के अज़ला की तक़रीबन एक सौ मसाजिद में ख़त्ताती की ख़िदमत अंजाम दी है।

इन का लिखा सूरा यासीन का एक बड़ा फ्रे़म जामिआ निज़ामीया में लगा है। उन्हों ने 99 असमा-ए अलहाई और असमा-ए नबी ई भी मुनक़्क़श किए हैं। ख़ास बात ये हीका अनील कुमार ने इस ख़िदमत का कोई मुआवज़ा नहीं लिया है। अगर अवाम अपनी तरफ़ से कोई नज़राना देते हैं तो वो उसे क़बूल करते हैं।

उन्हों ने ख़त्ताती उस वक़्त शुरू की जबकि वो उर्दू में साइन बोर्डस की पेंटिंग का काम शुरू किए थे और बैनर्स‌ लिख रहे थी। उन्हों ने उर्दू रस्म उलख़त में महारत हासिल की फिर अरबी लिखना उन के लिए आसान हो गया। शुरू में मसाजिद में उन के लिखे कुतबे लगाने में क़दरे ताम्मुल हो रहा था, लेकिन

अनील कुमार अज़ीम दीनी दरसगाह जामिआ निज़ामीया से रुजूहुए और फ़तवा हासिल किया उन्हें तग़रे से लिखने की इजाज़त दी गई। इन से कहा गया कि वो आयात मुक़द्दस लिखने से पहले पाक साफ़ रहे। अनील क़ुरआन मजीद पढ़ नहीं सकते लेकिन उन्हें आयात करानी लिखने में कमाल हासिल है।

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